यमक अलंकार किसे कहते है? अर्थ, परिभाषा, भेद,और उदाहरण – हिन्दी व्याकरण

यमक अलंकार का अर्थ-

यमक शब्द का अर्थ है = युग्म, जोड़ा या दोहराव

यमक अलंकार में एक ही शब्द दो या दो से अधिक बार आता है और प्रत्येक बार उसके अर्थ में परिवर्तन हो जाता है।

यमक अलंकार किसे कहते है-

परिभाषा – जब कोई शब्द एक से अधिक बार आए और उसके अर्थ अलग – अलग हो तो वहाँ यमक अलंकार होता है।

  • एक शब्द बार-बार आए + हर बार अलग अर्थ दे = यमक अलंकार

उदाहरण –

कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय

इस वाक्य में कनक शब्द दो बार आया है, जिसमे पहले कनक का अर्थ है धतूरा और दूसरे कनक का अर्थ है सोना, तो यह यमक अलंकार है।

अन्य उदाहरण – 

  • तीन बेर खाती थी, वे तीन बेर खाती हैं।
  • पूजा में पूजा का भाव रखो।
  • हार पहनकर सुंदर नारी, रण में भी न मानी हार।
  • फल की इच्छा छोड़कर कर्म का फल प्राप्त करो।
  • मन के मनके फेरकर, मन का मैल मिटाइए।
  • किसी सोच में हो विभोर साँसें कुछ ठंडी खिंची।
    फिर झट गुलकर दिया दिया को दोनों आँखें मिंची।।
  • ऊँचे घोर मंदर के अंदर रहन वारी।
    ऊँचे घोर मंदर के अंदर रहाती है।।

यमक अलंकार की मुख्य विशेषताएँ-

  • यह शब्दालंकार है
  • इसमें किसी शब्द या शब्द – समूह की पुनरावृत्ति होती है
  • दोहराया गया शब्द प्रत्येक बार अलग अर्थ देता है
  • शब्दों का रूप प्रायः एक जैसा रहता है
  • शब्द की पुनरावृत्ति से काव्य में चमत्कार और सुंदरता आती है
  • यदि शब्द बार-बार आए लेकिन हर बार उसका अर्थ एक ही रहे, तो यमक अलंकार नहीं होगा।

यमक अलंकार के भेद-

यमक अलंकार के मुख्य रूप से दो ( 2 ) भेद होते है-

  1. अभंग यमक अलंकार
  2. सभंग यमक अलंकार

इन दोनों को विस्तार से समझते है-

1. अभंग यमक अलंकार-

अभंग का अर्थ होता है = जो न टूटे ( अखंड या अटूट )

परिभाषा – जब किसी पद में शब्द के टुकड़े किए बिना (बिना तोड़े) उसकी आवृत्ति दिखाई देती है और हर बार अर्थ अलग होता है, तो वहाँ अभंग यमक अलंकार होता है।

शब्द वही रहे + बार-बार आए + हर बार अर्थ अलग हो = अभंग यमक अलंकार

उदाहरण –

कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय

यहाँ कनक शब्द दो बार आया है, इसमें से पहले कनक का अर्थ सोना तथा दूसरे का अर्थ धतूरा है।

दोनों जगह कनक शब्द अपने पूरे रूप में आया है। उसे तोड़ा या विभाजित नहीं किया गया है। अतः यहाँ अभंग यमक अलंकार है।

अभंग यमक अलंकार के अन्य उदाहरण – 

  • तीन बेर खाती थी, वे तीन बेर खाती हैं।
  • हार पहनकर भी वह हार गया।
  • फल पाकर वृक्ष का फल बढ़ गया।

2. सभंग यमक अलंकार-

यहाँ सभंग का अर्थ = भंग करके अर्थात् तोड़कर

परिभाषा – जहाँ शब्द तोड़कर और वर्णों को अलग करके पुनः प्रयोग किया जाए और दोनों से अलग – अलग अर्थ निकले वहाँ सभंग यमक अलंकार होता है।

उदहारण –

हरिनी के नैनन तें हरि नीकै ये नैन

यहाँ हरिनी’ को तोड़कर ‘हरि नीकै’ के साथ आवृत्ति बनाई गई है, अतः यह सभंग यमक अलंकार है।

अन्य उदाहरण –  

  • फिर तुम तम में, मैं प्रियतम में, हो जाएँ द्रुत अन्तर्धान
  • यों परदे की इज्जत परदेसी के हाथ बिकानी थी
  • कुमोदिनी मानस मोदिनी कहीं

अभंग और सभंग यमक अलंकार में अंतर-

  • अभंग = बिना तोड़े 
  • सभंग = तोड़कर 
आधार अभंग यमक सभंग यमक
शब्द का प्रयोग पूरा शब्द दोहराया जाता है शब्द/वर्ण को तोड़कर प्रयोग किया जाता है
शब्द का भंग नहीं होता होता है
अर्थ अलग-अलग होते हैं अलग-अलग होते हैं
मुख्य पहचान पूरा शब्द पुनः आता है शब्द को विभाजित करने पर अर्थ निकलता है

यमक अलंकार FAQs-

प्रश्न- यमक अलंकार किसे कहते है?

उत्तर- जब एक शब्द बार-बार आए और हर बार अलग अर्थ दे तो वह यमक अलंकार होता है

प्रश्न- यमक अलंकार के कितने भेद होते है? 

उत्तर- यमक अलंकार के मुख्य रूप से दो ( 2 ) भेद होते है- 1. अभंग यमक ( बिना शब्द तोड़े ) 2. सभंग यमक ( शब्द तो तोड़कर )

प्रश्न- यमक अलंकार और श्लेष अलंकार में क्या अंतर होता है?

उत्तर- यमक में शब्द की पुनरावृत्ति होकर अर्थ अलग-अलग होते हैं, जबकि श्लेष में शब्द एक बार आकर अनेक अर्थ देता है

 

 

 

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