भाववाच्य किसे कहते हैं? परिभाषा, अर्थ, भेद और उदाहरण, हिंदी व्याकरण
भाववाच्य किसे कहते है?
परिभाषा – जिस वाक्य में कर्ता या कर्म की प्रधानता न होकर क्रिया के भाव की प्रधानता हो उसे भाववाच्य कहते है।
अर्थात जिस वाक्य में किसी कार्य के होने, न होने, करने या न कर पाने के भाव को प्रधानता दी जाती है, उसे भाववाच्य कहते हैं।
उदाहरण –
- राम से चला नही जाता।
इस वाक्य में राम मुख्य रूप से यह नहीं बता रहा कि वह क्या कर रहा है, बल्कि चलने की क्रिया न कर पाने का भाव प्रधान है। इसीलिए यह भाववाच्य है।
भाववाच्य की मुख्य विशेषताएँ
- इसमें क्रिया के भाव की प्रधानता होती है।
- इसमें प्रायः अकर्मक क्रियाओं का प्रयोग होता है।
- कर्ता के साथ अक्सर से का प्रयोग किया जाता है।
- क्रिया सामान्यतः पुल्लिंग एकवचन में होती है।
- वाक्य में अक्सर नकारात्मक का भाव रहता है।
- इसमें अक्सर असमर्थता, इच्छा, अनिच्छा या कार्य की स्थिति का भाव प्रकट होता है।
- भाववाच्य में क्रिया को विशेष महत्व दिया जाता है।
भाववाच्य का अर्थ
भाव + वाच्य = भाववाच्य
यहाँ भाव का अर्थ – कार्य या क्रिया के होने अथवा न होने की स्थिति।
इसमें मुख्य ध्यान इस बात पर होता है कि –
- काम हो रहा है कि नही
- काम किया जा सकता है कि नही
- काम करने की स्थिति है या नही
भाववाच्य की पहचान कैसे करें?
भाववाच्य पहचानने के लिए वाक्य में देखें कि कर्ता या कर्म में से कोई प्रधान है या नहीं।
यदि मुख्य रूप से क्रिया या कार्य के भाव की प्रधानता हो, तो वह भाववाच्य होता है।
भाववाच्य में अक्सर इस प्रकार के प्रयोग मिलते हैं—
- से
- नही जाता
- नही जाता है
- नही गया
- नही जा सकता
उदाहरण –
- मोहन से दौड़ा नही जाता।
यहाँ मुख्य बात मोहन नहीं है, बल्कि दौड़ने की असमर्थता का भाव है। इसलिए यह भाववाच्य है।
भाववाच्य में कर्ता की क्या स्थिति
भाववाच्य में कर्ता मौजूद हो सकता है, लेकिन वह प्रधान नहीं होता।
उदाहरण –
- राम से दौड़ा नही जाता।
यहाँ राम कार्य से संबंधित है, लेकिन वाक्य में मुख्य जोर दौड़ने की असमर्थता पर है।
भाववाच्य में कर्म की स्थिति
भाववाच्य में कर्म प्रधान नही होता है इसलिए भाववाच्य में मुख्य ध्यान किसी वस्तु पर नहीं बल्कि क्रिया के भाव पर होता है।
उदाहरण –
- मुझसे पढ़ा नही जाता।
यहाँ कोई कर्म प्रधान नहीं है।
मुख्य भाव है – पढ़ने में असमर्थता।
इसीलिए यह भाववाच्य है।
भाववाच्य और कर्तृवाच्य में अंतर
राम दौड़ता है।
यहाँ राम स्वयं काम कर रहा है और कर्ता प्रधान है, इसीलिए यह कर्तृवाच्य है।
राम से दौड़ा नही जाता।
यहाँ दौड़ने की असमर्थता का भाव प्रधान है। इसीलिए यह भाववाच्य है।
भाववाच्य और कर्मवाच्य में अंतर
पत्र राम द्वारा लिखा जाता है।
यहाँ पत्र प्रधान है। इसीलिए यह कर्मवाच्य है।
राम से पत्र नहीं लिखा जाता।
यहाँ मुख्य जोर पत्र पर नहीं बल्कि पत्र न लिख पाने के भाव पर है। इसीलिए यह भाववाच्य है।
भाववाच्य के उदाहरण –
- राम से चला नही जाता।
- मोहन से दौड़ा नही जाता।
- मुझसे अब पढ़ा नही जाता।
- उससे इतना तेज अब दौड़ा नही जाता।
- श्याम से तेज चला नही जाता।
- राधा से रोया नही जाता।
- मुझसे देर तक लिखा नही जाता।
- सीता से अब खाया नही जाता।
- खिलाड़ियों से लगातार खेला नहीं जाता।
- उससे लगातार पढ़ा नहीं जाता।
- उससे इतना काम नहीं किया जाता।
भाववाच्य FAQs
प्रश्न- भाववाच्य किसे कहते है?
उत्तर- जिस वाक्य में किसी कार्य के होने, न होने, करने या न कर पाने के भाव को प्रधानता दी जाती है, उसे भाववाच्य कहते हैं।
प्रश्न- भाववाच्य में किसकी प्रधानता होती है?
उत्तर- इसमें क्रिया के भाव की प्रधानता होती है।
प्रश्न- मोहन से दौड़ा नही जाता। इस वाक्य में कौन सा वाच्य है?
उत्तर- भाववाच्य
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