समुच्चयबोधक किसे कहते है? परिभाषा, भेद और उदाहरण
परिभाषा – समुच्चयबोधक वे अव्यय शब्द है जो शब्दों, वाक्यों तथा वाक्यांशों को जोड़ने का काम करते है उन्हें समुच्चयबोधक अव्यय कहते है।
जैसे – और, तथा, एवं, या, अथवा, लेकिन, किंतु, परंतु, बल्कि, क्योंकि, इसलिए, अतः, यदि, तो, ताकि, जब, तब, कि, मानो, अथवा आदि शब्द अगर शब्दों, वाक्यों तथा वाक्यांशों के बीच आये तो इन्हें समुच्चयबोधक अव्यय कहते है।
उदाहरण –
- राम और श्याम पढ़ते है।
- वह मेहनत कहते है लेकिन सफल नही हुआ।
- तुम चाय या काफी लोगे।
- जल्दी करो क्योंकि समय कम है।
- उसने बहुत समझाया लेकिन किसी ने उसकी बात नही मानी।
इन सभी उदाहरणों में और, लेकिन, या, क्योंकि शब्द वाक्कायों को जोड़ने का काम कर रहे है इसीलिए ये सभी शब्द समुच्चयबोधक अव्यय है।
समुच्चयबोधक के भेद –
समुच्चयबोधक के मुख्यतः दो ( 2 ) भेद होते है।
- समानाधिकरण समुच्चयबोधक
- व्यधिकरण समुच्चयबोधक
1. समानाधिकरण समुच्चयबोधक
परिभाषा – जिन समुच्चयबोधक अव्ययों के कारण समान पद, शब्द, वाक्यांश या स्वतंत्र वाक्यों को आपस में जोड़ा जाता है उन्हें समानाधिकरण समुच्चयबोधक कहते है।
जैसे- और, एवं, ताकि, किन्तु, परन्तु, मगर, लेकिन आदि।
उदाहरण –
- राम और श्याम बाजार जा रहे है।
- मुझे पैसे या फ़ोन देदो।
- तुम चाय या कॉफ़ी पी सकते हो।
- मैंने उसे समझाया, परंतु वह नहीं माना।
- राम खेलता है लेकिन श्याम पढता है।
समानाधिकरण समुच्चयबोधक के उपभेद –
समानाधिकरण समुच्चयबोधक के मुख्यतः चार ( 4 ) भेद होते है।
- संयोजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक
- विकल्प समानाधिकरण समुच्चयबोधक
- विरोधक समानाधिकरण समुच्चयबोधक
- परिणामक समानाधिकरण समुच्चयबोधक
1. संयोजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक-
परिभाषा – जिन समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्ययों का प्रयोग दो या दो से अधिक समान शब्दों, पदों, वाक्यांशों अथवा वाक्यों को आपस में जोड़ने के लिए किया जाता है, उन्हें संयोजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं।
जैसे- और, तथा, एवं, जोकि, अर्थात, भी, तथा, ही नहीं आदि।
उदाहरण-
- राम और श्याम क्रिकेट खेलने गये।
- गांधी जी ने सत्य तथा अहिंसा का पाठ पढाया।
- मोहन एवं सोहन मित्र है।
- न केवल वह बुद्धिमान है, बल्कि मेहनती भी है।
2. विकल्प समानाधिकरण समुच्चयबोधक-
परिभाषा- समुच्चयबोधक शब्द जो दो या दो से अधिक शब्दों, पदों, वाक्यांशों अथवा वाक्यों में विकल्प प्रकट करते हुए उन्हें जोड़ते है, उन्हें विकल्प समानाधिकरण समुच्चयबोधक कहते है।
जैसे- या, अथवा, वा, चाहे, या तो, ताकि आदि।
उदाहरण –
- तुम खाना खाओगे या पढाई करोगे।
- राम या श्याम में से कोई एक आएगा।
- तुम घर पर रहो अथवा मेरे साथ चलो।
- चाहे दिन हो चाहे रात, वह मेहनत करता है।
3. विरोधक समानाधिकरण समुच्चयबोधक-
परिभाषा – जिन समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्ययों का प्रयोग दो ऐसे शब्दों, पदों, वाक्यांशों या वाक्यों को जोड़ने के लिए किया जाता है, जिनमें परस्पर विरोध या विपरीत भाव का संबंध हो, उन्हें विरोधक समानाधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं।
जैसे- लेकिन, किंतु, परंतु, मगर, बल्कि, पर, फिर भी, तथापि आदि।
उदाहरण –
- मोहन, श्याम के घर गया परन्तु वह नही मिला।
- वह गरीब है लेकिन ईमानदार है।
- राम ने बहुत प्रयास किया मगर वह सफल नही हुआ।
- वह बीमार था फिर भी कार्यालय गया।
- राम मेहनती है किन्तु उसका भाई आलसी है।
4. परिमाणक समानाधिकरण समुच्चयबोधक-
परिभाषा – जो समुच्चयबोधक अव्यय पहले वाक्य के परिणाम या फल को दूसरे वाक्य से जोड़ते हैं, उन्हें परिमाणक समानाधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं।
जैसे- इसलिए, अतः, सो, फलतः, अतएव, नहीं तो आदि।
उदाहरण –
- उसने बहुत मेहनत की, इसलिए वह परीक्षा में सफल हुआ।
- बारिश बहुत तेज थी, अतः हम घर से बाहर नहीं निकले।
- आज बहुत ठंड थी इसीलिए बच्चे बाहर नही खेले।
- वह नियमित रूप से पढ़ता था, अतएव अच्छे अंक प्राप्त किए।
- उसने नियमों का पालन नहीं किया, फलतः उसे दंड मिला।
2. व्यधिकरण समुच्चयबोधक-
परिभाषा – जो समुच्चयबोधक अव्यय प्रधान वाक्य और आश्रित वाक्य को जोड़ते हैं, उन्हें व्यधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं।
जैसे- कि, क्योंकि, यदि, ताकि, जिससे, यद्यपि, जब, जहाँ आदि।
उदाहरण –
- यदि वर्ष होती तो फसल अच्छी होती।
- मुझे पता है कि वह आएगा।
- मैं नहीं आया क्योंकि मैं बीमार था।
- यदि तुम पढ़ोगे, तो सफल होगे।
- वह जल्दी आया ताकि काम पूरा कर सके।
व्यधिकरण समुच्चयबोधक के भेद-
व्यधिकरण समुच्चयबोधक के मुख्यतः चार ( 4 ) भेद होते है।
- कारणबोधक व्यधिकरण समुच्चयबोधक
- स्वरूपबोधक व्यधिकरण समुच्चयबोधक
- संकेतबोधक व्यधिकरण समुच्चयबोधक
- उद्देश्य व्यधिकरण समुच्चयबोधक
1. कारणबोधक व्यधिकरण समुच्चयबोधक-
परिभाषा- जो व्यधिकरण समुच्चयबोधक शब्द वाक्यों के उपवाक्यो में कारण का बोध कराएँ उन्हें कारणबोधक व्यधिकरण समुच्चयबोधक कहते है।
जैसे- क्योंकि, चूँकि, इसलिए आदि।
उदाहरण –
- मैं विद्यालय नहीं गया क्योंकि मैं बीमार था।
- सीता खाना नही बना सकी चूँकि वह बीमार है।
- वह परीक्षा में सफल हुआ क्योंकि उसने बहुत मेहनत की थी।
2. स्वरुपबोधक व्यधिकरण समुच्चयबोधक-
परिभाषा- जो अवव्य शब्दों के बाद आने वाले वाक्य या कथन पहले वाक्य या कथन का स्पष्टीकरण करते है, उन्हें स्वरुपबोधक व्यधिकरण समुच्चयबोधक कहते है।
जैसे- अर्थात, यानी, मानो आदि।
उदाहरण –
- वह बहुत कंजूस है, अर्थात एक पैसा भी खर्च नहीं करता।
- उसने मेरी मदद नहीं की, यानी वह मेरा सच्चा मित्र नहीं है।
- वह इस तरह डर रहा है मनो उसने ही गलती की हो।
3. संकेतबोधक व्यधिकरण समुच्चयबोधक-
परिभाषा- जो व्यधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय एक वाक्य में किसी शर्त, संकेत या संभावना को प्रकट करते हुए दूसरे वाक्य से जोड़ते हैं, उन्हें संकेतबोधक व्यधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं।
जैसे- यदि, तो, यद्यपि, तथापि आदि।
उदाहरण –
- यदि तुम मेहनत करोगे, तो अवश्य सफल होगे।
- अगर बारिश होगी, तो हम बाहर नहीं जाएँगे।
- जब तुम बुलाओगे, तब मैं आ जाऊँगा।
- यद्यपि उसने परिश्रम किया तथापि सफलता प्राप्त न कर सका।
4. उद्देश्य व्यधिकरण समुच्चयबोधक-
परिभाषा – जो व्यधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय किसी कार्य के उद्देश्य या प्रयोजन का बोध कराते हुए प्रधान वाक्य को आश्रित वाक्य से जोड़ते हैं, उन्हें उद्देश्यबोधक व्यधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं।
जैसे- ताकि, जिससे, कि आदि।
उदाहरण –
- वह मेहनत करता है ताकि परीक्षा में सफल हो सके।
- उसने गरीबों की मदद की जिससे उनकी कठिनाई दूर हो सके।
- उसने डॉक्टर से दवा ली जिससे कि वह जल्दी ठीक हो जाये।
समुच्चयबोधक अव्यय FAQs
प्रश्न- समुच्चयबोधक अव्यय किसे कहते है?
उत्तर- वे अव्यय शब्द है जो शब्दों, वाक्यों तथा वाक्यांशों को जोड़ने का काम करते है उन्हें समुच्चयबोधक अव्यय कहते है।
प्रश्न- समुच्चयबोधक अव्यय के कितने भेद होते है?
उत्तर- समुच्चयबोधक अव्यय के दो भेद ( समानाधिकरण समुच्चयबोधक, व्यधिकरण समुच्चयबोधक ) होते है।
प्रश्न- समानाधिकरण समुच्चयबोधक के कितने भेद होते है?
उत्तर- चार भेद होते है।
प्रश्न- समानाधिकरण समुच्चयबोधक किसे कहते हैं?
उत्तर- जो अव्यय समान स्तर वाले शब्दों या वाक्यों को जोड़ते हैं, उन्हें समानाधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं।
प्रश्न- राम और श्याम बाजार गए। में समुच्चयबोधक कौन-सा है?
उत्तर- और
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