वीभत्स रस किसे कहते है परिभाषा- घृणित वस्तुओं, घृणित चीज या घृणित व्यक्ति को देखकर या उनके सम्बन्ध में विचार करके या उनके सम्बन्ध में सुनकर मन में उत्पन्न होने वाली घृणा को ही वीभत्स रस कहते है। सरल शब्दों में...
हास्य रस किसे कहते है? परिभाषा– किसी विकृत या असामान्य हाव भाव, चेष्टा, क्रिया, वार्तालाप, व्यक्ति तथा स्थिति का ऐसा चित्रण जिसमे हास्य उत्पन्न होता है, उसे हास्य रस कहते है। सरल शब्दों में – जिस रचना को पढ़कर या सुनकर...
वीर रस किसे कहते है? परिभाषा – जिस काव्य या साहित्यिक रचना में युद्ध, पराक्रम, साहस, दान, दया अथवा धर्म की रक्षा आदि के माध्यम से उत्साह और वीरता की भावना उत्पन्न होती है, वहाँ वीर रस होता है। सरल शब्दों...
श्रृंगार रस किसे कहते है? श्रृंगार रस को रसराज या रसपति कहा जाता है परिभाषा- जहाँ स्त्री-पुरुष के परस्पर प्रेम, आकर्षण, सौंदर्य, मिलन या विरह से उत्पन्न भावों की कलात्मक अभिव्यक्ति होती है, वहाँ श्रृंगार रस होता है। सरल शब्दों में...
करुण रस किसे कहते है? करुण रस का संबंध दुःख, शोक, वियोग और पीड़ा से है। परिभाषा –जब किसी प्रिय व्यक्ति के वियोग, मृत्यु, विनाश, विपत्ति या दुखद घटना के कारण हृदय में शोक और दुःख का भाव उत्पन्न होता है...
दृष्टान्त अलंकार किसे कहते है- दृष्टान्त का अर्थ होता है – उदाहरण या मिसाल परिभाषा- जहाँ दो सामान्य या विशेष वाक्यों में विम्ब – प्रतिबिंब का भाव होता है, वहाँ दृष्टान्त अलंकार होता है। इस अलंकार में उपमेय रूप में कही गई बात...
रस किसे कहते है रस का शाब्दिक अर्थ है – आनंद की अनुभूति रस ‘सृ’ धातु से बना है, ‘सृ’ का अर्थ है बहते जाना रस को काव्य की आत्मा या प्राणतत्व माना जाता है परिभाषा– काव्य को पढने या सुनने...
अन्योक्ति अलंकार किसे कहते है- अन्योक्ति दो शब्दों अन्य + उक्ति से मिलकर बना है। अन्य का अर्थ = दूसरा उक्ति का अर्थ = कथन परिभाषा – जहाँ किसी की उक्ति ( कथन या बात ) के माध्यम से किसी अन्य...
मानवीकरण अलंकार किसे कहते है? मानवीकरण दो शब्दों मानव और करण से मिलकर बना है- मानव = मनुष्य कारण = बनाना अर्थात किसी अमानवीय वस्तु को मनुष्य के सामान बना देना या उसमे मानवीय गुणों का आरोप करना मानवीकरण कहलाता है परिभाषा- ...
विरोधाभास अलंकार किसे कहते है? विरोधाभास दो शब्द विरोध और आभास से मिलकर बना है- विरोध = विपरीतता या आपस में न मिलना आभास = दिखाई देना या प्रतीत होना अर्थात जहाँ वास्तविक विरोध न होते हुए भी विरोध दिखाई दे,...