भयानक रस किसे कहते है? परिभाषा, भेद और उदाहरण – हिन्दी व्याकरण

भयानक रस किसे कहते हैं?

परिभाषा- जब किसी कविता, कहानी या दृश्य को देखकर मन में डर, भय, घबराहट या आतंक का भाव उत्पन्न होता है, तब वहाँ भयानक रस होता है।

सरल शब्दों में– जिस काव्य या रचना को पढ़ने, सुनने या देखने से मन में भय, डर या घबराहट उत्पन्न हो, वहाँ भयानक रस होता है।

स्थायी भाव = भय

मुख्य भाव = डर, आतंक और घबराहट

रस का उद्देश्य = पाठक या दर्शक के मन में भय का अनुभव उत्पन्न करना

उदाहरण – 

घोर अँधेरी रात थी, जंगल था सुनसान।
पत्तों की आहट सुनकर, काँप उठा इंसान॥

इस वाक्य में सुनसान जंगल और अँधेरी रात में आहट सुनकर व्यक्ति के मन में डर उत्पन्न हो रहा है। इसलिए यहाँ भयानक रस है।

भयानक रस के प्रमुख तत्व-

तत्व अर्थ और उदाहरण
स्थायी भाव मन में स्थिर रहने वाला मुख्य भाव — भय
आलंबन विभाव भय उत्पन्न करने वाला व्यक्ति या वस्तु — भूत, हिंसक पशु, अपराधी
उद्दीपन विभाव भय को बढ़ाने वाली परिस्थितियाँ — अँधेरा, सुनसान जंगल, डरावनी आवाजें
अनुभाव भय उत्पन्न होने पर दिखाई देने वाली प्रतिक्रियाएँ — काँपना, चीखना, पसीना आना
संचारी भाव कुछ समय के लिए उत्पन्न होने वाले सहायक भाव — शंका, चिंता, आवेग, मोह

 

भयानक रस की प्रमुख विशेषताएँ-

  • स्थायी भाव भय है। इसमें डर मुख्य भाव होता है।
  • डरावनी परिस्थितियों का वर्णन होता है। जैसे अँधेरी रात, सुनसान जंगल और खतरनाक स्थान।
  • मन में घबराहट उत्पन्न होती है। पाठक या पात्र भय का अनुभव करता है।
  • शारीरिक प्रतिक्रियाएँ दिखाई देती हैं। जैसे काँपना, पसीना आना और चीखना।
  • रहस्य और आतंक का वातावरण बनता है। इससे भय का प्रभाव बढ़ता है।
  • खतरे का आभास होता है। जैसे हिंसक जानवर, अपराधी या किसी अनजान खतरे का सामना।
  • कविता, कहानी और नाटक में प्रयोग होता है। डरावने दृश्यों के माध्यम से इस रस को व्यक्त किया जाता है।

भयानक रस के भेद –

भयानक रस के मुख्यतः दो ( 2 ) भेद माने जाते है –

1. स्वाभाविक भय-

जब किसी वास्तविक खतरे या परिस्थिति के कारण मन में डर उत्पन्न होता है, तो उसे समझने के लिए स्वाभाविक भय कहा जा सकता है।

उदाहरण- 

सामने खड़ा था सिंह, दहाड़ रहा था बारंबार।
भय से काँप उठा पथिक, भागा छोड़कर राह॥

इस वाक्य में सिंह को देखकर व्यक्ति के मन में वास्तविक खतरे का डर पैदा होता है, अतः यह स्वाभाविक भय है।

2. कल्पित या काल्पनिक भय-

जब किसी कल्पना, भ्रम या ऐसी चीज के विचार से डर लगता है जिसकी वास्तविकता निश्चित नहीं है, तो उसे समझने के लिए काल्पनिक भय कहा जा सकता है।

उदाहरण-

रात अँधेरी, वृक्ष की छाया, लगी भूत-सी आने।
डरकर भागा बालक, बिना सत्य को पहचाने॥

इस वाक्य में बालक पेड़ की छाया को भूत समझकर डर जाता है। इसलिए यह काल्पनिक भय का उदाहरण है।

भयानक रस के प्रमुख उदाहरण –

  • एक ओर अजगरहि लखि, एक ओर मृगराय।
    विकल बटोही बीच ही, परयो मूरछा खाय॥
  • उधर गरजती सिंधु लहरियाँ, कुटिल काल के जालों-सी।
    चली आ रही फेन उगलती, फन फैलाए व्यालों-सी॥
  • बालधि विशाल, विकराल ज्वाला-जाल मानो,
    लंक लीलिबे को काल रसना पसारी है।
  • घोर अँधेरी रात में, जंगल पड़ा सुनसान।
    दूर कहीं से चीख उठी, काँप उठा इंसान॥
  • बादल गरजे जोर से, बिजली चमकी घोर।
    भय से काँप उठे सभी, बंद हुए सब द्वार॥
  • सुनसान पथ पर रात में, छाया दिखी विशाल।
    देखकर उस रूप को, हुआ सभी का हाल बेहाल॥
  • श्मशान भूमि के बीच में, गूँजी आवाज़ अजीब।
    भय से थर-थर काँपता, लौट पड़ा पथिक॥
  • पर्वत से पत्थर गिर पड़े, गूँज उठा आकाश।
    जान बचाने के लिए, भागे लोग हताश॥
  • घनघोर घटा छा गई, सूरज गया छिपाय।
    अंधकार के बीच में, भय ने लिया सताय॥
  • गुफा के भीतर गूँजती, किसी जीव की चीख।
    सुनकर उस आवाज़ को, सबकी साँसें रुक गईं॥
  • वन में सिंह दहाड़ता, आँखों में अंगार।
    सामने उसको देखकर, भागा पथिक पुकार॥
  • चारों ओर धुआँ उठा, आग लगी विकराल।
    जीवन बचाने के लिए, मचा भयंकर हाल॥
  • रात अँधेरी, राह कठिन, दूर-दूर तक मौन।
    पीछे से पदचाप सुन, भयभीत हुआ जन कौन॥
  • नभ में बिजली कौंधती, गर्जन करता मेघ।
    भय से काँप उठा हृदय, बढ़ने लगा संवेग॥
  • खंडहर के उस द्वार पर, लटकी टूटी जंजीर।
    चरमराहट सुनकर वहाँ, काँप उठा हर शरीर॥

भयानक रस FAQs-

प्रश्न- भयानक रस किसे कहते है?

उत्तर- जिस काव्य में भय, डर या आतंक का भाव उत्पन्न हो, वहाँ भयानक रस होता है।

प्रश्न- भयानक रस का स्थायी भाव क्या है?

उत्तर- भय

प्रश्न- भयानक रस में किस तरह के भाव दिखाई देते हैं?

उत्तर- डर, घबराहट, आतंक, चिंता और शंका जैसे भाव

प्रश्न- भयानक रस के कितने भेद है?

उत्तर- भयानक रस के दो ( 2 ) भेद है –  ( स्वाभाविक भय और कल्पित या काल्पनिक भय )

 

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