क्रियाविशेषण- परिभाषा, भेद और उदाहरण

क्रियाविशेषण किसे कहते है?

परिभाषा – जो अविकारी शब्द क्रिया की विशेषता, अवस्था, समय, स्थान, रीति, मात्रा आदि का बोध कराते है, उन्हें क्रियाविशेषण कहते है।

सरल शब्दों में – जिन शब्दों से क्रिया की विशेषता का पता चलता है उन्हें क्रियाविशेषण कहते है।

जैसे- धीरे – धीरे, आगे, भीतर, ऊपर, अभी – अभी, बार – बार, थोडा, इतना, कितना, केवल, आज, कल, परसों आदि।

उदाहरण –

  • राहुल धीरे – धीरे दौड़ता है।

यहाँ धीरे – धीरे दौड़ने की रीति बता रहा है।

  • सीता आज आएगी।

यहाँ आज समय के बारे में बता रहा है।

  • राम बाहर खेल रहा है।

यहाँ बाहर खेलने का स्थान बता रहा है।

  • श्याम बहुत तेज दौड़ता है।

यहाँ बहुत दौड़ने की मात्र/परिणाम बता रहा है।

इन सभी वाक्यों में धीरे – धीरे, आज, बाहर, बहुत क्रिया विशेषण है।

क्रियाविशेषण की विशेषताएँ

  • क्रिया विशेषण अविकारी शब्द होते है।

इनके रूप में लिंग, वचन, पुरुष आदि के कारण परिवर्तन नही होता।

उदाहरण के लिए – राम धीरे चलता है,  सीता धीरे चलती है, बच्चे धीरे चलते है। यहाँ धीरे शब्द में कोई परिवर्तन नही।

  • ये मुख्यतः क्रिया की विशेषता बताते है।

राजू तेज दौड़ता है 

यहाँ तेज शब्द दौड़ता है क्रिया कि विशेषता बता रहा है।

  • कभी – कभी विशेषण या दूसरे क्रियाविशेषण की विशेषता बताते है

श्याम ने गाना बहुत खूबसूरती से गाया 

यहाँ बहुत शब्द गाना की विशेषता बता रहा है

  • क्रियाविशेषण में क्रिया के बारे में अधिक जानकरी मिलती है।

क्रियाविशेषण का वर्गीकरण – 

सामान्यतः क्रियाविशेषण को तीन ( 3 ) भागो में बाँटा गया है।

  1. अर्थ के आधार पर क्रियाविशेषण
  2. प्रयोग के आधार पर क्रियाविशेषण
  3. रूप के आधार पर क्रियाविशेषण

1. अर्थ के आधार पर क्रियाविशेषण के भेद –

अर्थ के आधार पर क्रियाविशेषण के  चार ( 4 ) भेद है।

  1. कालवाचक क्रियाविशेषण 
  2. स्थानवाचक क्रियाविशेषण 
  3. रीतिवाचक क्रियाविशेषण 
  4. परिमाणवाचक क्रियाविशेषण 

1. कालवाचक क्रियाविशेषण –

परिभाषा – जो अविकारी शब्द किसी क्रिया के होने का समय बतलाते है, उन्हें कालवाचक क्रियाविशेषण कहते है।

अर्थात ये बताते है कि क्रिया कब हुई, कब हो रही है या कब होगी

जैसे- आज, कल, परसों, अभी, अब, तब, कभी, हमेशा, सदैव, प्रतिदिन, रोज, नित्य, प्रायः, पहले, बाद में, तुरंत, शीघ्र, कभी-कभी, अक्सर, रात में, सुबह, शाम को आदि।

पहचान – वाक्य में प्रश्न करें, जो शब्द उत्तर दे वह कालवाचक क्रियाविशेषण हो सकती है।

उदाहरण

  • राजू कल आएगा 

राजू कब आएगा? = कल

इसीलिए कल कालवाचक क्रियाविशेषण है

कालवाचक क्रियाविशेषण के अन्य उदाहरण- 

  • सीता आज आयेगी।
  • वह कल विद्यालय गया था।
  • राहुल अभी पढ़ रहा है।
  • रमेश प्रतिदिन व्यायाम करता है।
  • सीता हमेशा अच्छा खाना बनाती है।
  • राजू अब घर जाएगा।
  • रवि तुरंत वहाँ पहुँचा।
  • सोहन पहले यहाँ रहता था।

2. स्थानवाचक क्रियाविशेषण-

परिभाषा – जो अविकारी शब्द किसी क्रिया के व्यापार – स्थान का बोध कराते है उन्हें स्थानवाचक क्रियाविशेषण कहते है।

अर्थात ये बताते है कि क्रिया कहाँ हुई या किस दिशा में हुई

जैसे- यहाँ, वहाँ, कहाँ, जहाँ, इधर, उधर, किधर, अंदर, बाहर, ऊपर, नीचे, आगे, पीछे, पास, दूर, आसपास, सामने, भीतर, बाहर आदि।

पहचान – वाक्य में प्रश्न करें कि क्रिया कहाँ हुई, जिस शब्द से उत्तर मिल जाए वह स्थानवाचक क्रियाविशेषण होता है।

उदाहरण

राज बाहर क्रिकेट खेल रहा है  

प्रश्न – राज कहाँ क्रिकेट खेल रहा है = बाहर

अतः बाहर शब्द स्थानवाचक क्रियाविशेषण है।

स्थानवाचक क्रियाविशेषण के अन्य उदाहरण – 

  • मोहन यहाँ बैठा है।
  • राहुल कहाँ चल रहा है।
  • राम बाजार गया।
  • पक्षी ऊपर उड़ रहे हैं।
  • बिल्ली नीचे बैठी है।
  • राजेश आगे चल रहा है।
  • सैनिक पीछे हट गए।
  • तुम जाकर बैठो।
  • इधर आओ।
  • उधर मत जाओ।

3. रीतिवाचक क्रियाविशेषण-

परिभाषा – जो शब्द किसी क्रिया के होने की रीति, ढंग या तरीके का बोध कराएँ , उन्हें रीतिवाचक क्रियाविशेषण कहते है।

अर्थात इनके द्वारा बताया जाता है कि क्रिया कैसे हुई है।

जैसे- धीरे, तेज, धीरे-धीरे, जल्दी, चुपचाप, अचानक, सहसा, ध्यानपूर्वक, सावधानीपूर्वक, अच्छी तरह, बुरी तरह, प्रेमपूर्वक, बहादुरी से, इस प्रकार, उस प्रकार, ऐसे, वैसे आदि।

पहचान – वाक्य में प्रश्न करें कि क्रिया कैसे हुई, जिस शब्द से उत्तर मिल जाए वह रीतिवाचक क्रियाविशेषण होता है।

उदाहरण –

  • श्याम धीरे चलता है।

प्रश्न – वह कैसे चलता है = धीरे 

अतः धीरे शब्द रीतिवाचक क्रियाविशेषण है

रीतिवाचक क्रियाविशेषण के अन्य उदाहरण-

  • रमेश धीरे-धीरे चलता है।
  • रोहित तेज दौड़ता है।
  • मोहन ध्यानपूर्वक पढ़ता है।
  • सैनिक बहादुरी से लड़े।
  • राजू चुपचाप बैठा रहा।
  • बच्चे जल्दी भाग गए।
  • राम ने काम सावधानीपूर्वक किया।

4. परिमाणवाचक क्रियाविशेषण-

परिभाषा – जो अविकारी शब्द किसी क्रिया के परिणाम अथवा निश्चित संख्या का बोध कराते है उन्हें परिमाणवाचक क्रियाविशेषण कहा जाता है।

अर्थात ये बताते हैं कि क्रिया कितनी मात्रा में या किस सीमा तक हुई।

जैसे- बहुत, कम, अधिक, अत्यंत, बेहद, काफी, थोड़ा, अत्यधिक, इतना, उतना, जितना, कितना, सर्वथा, पूर्णतः, बिल्कुल, लगभग आदि।

पहचान – वाक्य में प्रश्न करे कि क्रिया कितनी मात्रा में हुई? जिस शब्द से उत्तर मिले वह परिमाणवाचक क्रियाविशेषण होता है।

उदाहरण

  • राजू बहुत खाना खाता है।

प्रश्न – राजू कितना खाना खाता है = बहुत

अतः इस वाक्य में बहुत शब्द परिमाणवाचक क्रियाविशेषण है।

परिमाणवाचक क्रियाविशेषण के अन्य उदाहरण- 

  • वह बहुत हँसता है।
  • राम कम बोलता है।
  • वह अधिक पढ़ता है।
  • मोहन बहुत अधिक दौड़ता है।
  • वह काफी थक गया।
  • उसने थोड़ा खाया।
  • वह अत्यंत धीरे चलता है।
  • रोहित ने पूरी किताब पढ़ ली।
  • खाना बहुत गर्म है।

2. प्रयोग के आधार पर क्रियाविशेषण के भेद –

प्रयोग के आधार पर क्रियाविशेषण के मुख्यतः तीन ( 3 ) भेद होते है

  1. साधारण क्रियाविशेषण
  2. संयोजक क्रियाविशेषण
  3. अनुबद्ध क्रियाविशेषण

1. साधारण क्रियाविशेषण-

परिभाषा – जो क्रियाविशेषण किसी वाक्य में स्वतंत्र रूप से प्रयुक्त होकर क्रिया की विशेषता बताते हैं, उन्हें साधारण क्रियाविशेषण कहते हैं।

उदाहरण – 

  • राजू धीरे चलता है।
  • सुनील आज शहर से आएगा।
  • बच्चे बाहर क्रिकेट खेल रहे हैं।
  • मोहन बहुत हँसता है।
  • सीता प्रतिदिन पढ़ती है।
  • राहुल अचानक गिर गया।

इन सभी वाक्यों में धीरे, आज, बाहर, बहुत, प्रतिदिन, अचानक शब्द स्वतंत्र होकर क्रिया की विशेषता बता रहे है, अतः यह साधारण क्रियाविशेषण है।

2. संयोजक क्रियाविशेषण-

परिभाषा – जो क्रियाविशेषण दो वाक्यों या उपवाक्यों को जोड़ने का कार्य करते हैं तथा साथ ही उनके बीच संबंध भी स्थापित करते हैं, उन्हें संयोजक क्रियाविशेषण कहते हैं।

ये क्रिया की विशेषता नही बताते है, बल्कि दो वाक्यों को जोड़ने का कार्य करते है 

जैसे- जब – तब, जहाँ – वहाँ, जिधर – उधर, जैसे – वैसे, जितना – उतना आदि

उदाहरण –

  • जब राम आएगा, तब मैं जाऊँगा।
  • जहाँ आप रहोगे, वहाँ मैं भी रहूँगा।
  • जिधर हवा चलेगी, उधर बादल जाएँगे।
  • जैसे तुम करोगे, वैसे ही फल मिलेगा।
  • जितना पढ़ोगे, उतना लाभ होगा।

इन सभी वाक्यों में जब – तब, जहाँ – वहाँ, जिधर – उधर, जैसे – वैसे, जितना – उतना शब्द संयोजक क्रियाविशेषण है।

 3. अनुबद्ध क्रियाविशेषण-

परिभाषा – जो क्रियाविशेषण किसी शब्द या वाक्यांश के साथ विशेष रूप से जुड़कर उसके अर्थ में विशेषता, सीमा, बल या आग्रह उत्पन्न करते हैं, उन्हें अनुबद्ध क्रियाविशेषण कहते हैं।

इन्हें सामान्यतः निपातात्मक प्रयोग के रूप में भी समझा जाता है।

जैसे- ही, भी, तो, तक, मात्र, भर, केवल, न, भी तो आदि

उदाहरण –

  • रामू ही जाएगा।
  • सीता भी खाना खाएगी।
  • तुम तो बहुत अच्छे हो।
  • वह यहाँ तक आया।
  • मेरे पास केवल दस रुपये हैं।
  • वह इतना भर जानता है।
  • मेरा काम गलत ही हुआ।

इन सभी वाक्यों में ही, भी, तो, तक, केवल, भर शब्द अनुबद्ध क्रियाविशेषण है।

3. रूप के आधार पर क्रियाविशेषण के भेद-

रूप के आधार पर क्रियाविशेषण के तीन ( 3 ) भेद होते है

  1. मूल क्रियाविशेषण
  2. यौगिक क्रियाविशेषण
  3. स्थानीय क्रियाविशेषण

1. मूल क्रियाविशेषण-

परिभाषा – जो क्रियाविशेषण किसी दूसरे शब्द में परिवर्तन, प्रत्यय या अन्य शब्द के योग से नहीं बने होते, बल्कि स्वतंत्र रूप से मूल रूप में प्रयुक्त होते हैं, उन्हें मूल क्रियाविशेषण कहते हैं।

अर्थात ये अपने मूल में ही क्रियाविशेषण करते है 

जैसे-  पास, दूर, ऊपर, आज, सदा, अचानक, फिर, नहीं ,ठीक आदि

उदाहरण –

सोहन आज स्कूल गया। 

यहाँ आज किसी दूसरे शब्द से बनकर नहीं आया है। यह मूल रूप में ही समय का बोध करा रहा है। इसलिए आज मूल क्रियाविशेषण है।

 

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