दृष्टान्त अलंकार किसे कहते है? अर्थ, परिभाषा और उदाहरण – हिन्दी व्याकरण
September 25, 2026
दृष्टान्त अलंकार किसे कहते है-
दृष्टान्त का अर्थ होता है – उदाहरण या मिसाल
परिभाषा- जहाँ दो सामान्य या विशेष वाक्यों में विम्ब – प्रतिबिंब का भाव होता है, वहाँ दृष्टान्त अलंकार होता है। इस अलंकार में उपमेय रूप में कही गई बात से मिलती – जुलती बात उपमान के रूप में दूसरे वाक्य में होती है।
सरल शब्दों में- किसी बात को समझाने के लिए उसी के समान दूसरी बात का उदाहरण देना हो वहाँ दृष्टान्त अलंकार होता है।
उदाहरण-
जैसे दीपक स्वयं जलकर, करता जग में प्रकाश।
वैसे ही सज्जन त्याग कर, करते सबका विकास॥
यहाँ दीपक के स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देने और सज्जन व्यक्ति के त्याग करके दूसरों का भला करने में समानता दिखाई गई है। अतः यह दृष्टान्त अलंकार है।
दृष्टान्त अलंकार की प्रमुख विशेषताएँ-
- इसमें किसी कथन को स्पष्ट करने के लिए उससे मिलते-जुलते उदाहरण का प्रयोग किया जाता है।
- मुख्य कथन और दिए गए उदाहरण में किसी न किसी प्रकार की समानता होती है।
- इसमें सामान्यतः दो बातें या कथन होते हैं, जिनमें परस्पर साम्य स्थापित किया जाता है।
- इसका मुख्य उद्देश्य किसी बात को उदाहरण के माध्यम से आसानी से समझाना होता है।
- उदाहरण के द्वारा कही गई बात को अधिक प्रभावशाली और विश्वसनीय बनाया जाता है।
- एक कथन में जो भाव होता है वही या उससे मिलता – जुलता भाव कथन में दिखाई देता है
दृष्टान्त अलंकार के मुख्य उदाहरण-
- जैसे चंदन के वृक्ष पर, साँप लिपटते आय।
चंदन अपना गुण नहीं, फिर भी कभी गँवाय॥
- जैसे जल में कमल रहे, फिर भी रहे निष्कलंक।
वैसे ही संसार में, साधु रहे निस्संग॥
- जैसे वृक्ष स्वयं फल नहीं खाता, न पीता है अपना नीर।
वैसे ही सज्जन दूसरों हित, करते जीवन धीर॥
- जैसे नाव बिना पतवार के, भटके बीच मझधार।
वैसे ही गुरु के बिना, भटके मानव संसार॥
- जैसे वर्षा की बूँद से, धरती हरियाली पाए।
वैसे ही अच्छे कर्म से, जीवन सुखमय हो जाए॥
- जैसे नदी अपना जल न पीती, सबकी प्यास बुझाए।
वैसे ही परोपकारी जन, सबके काम आए॥
- जैसे फूल स्वयं न सूँघता, खुशबू जग को दे।
वैसे ही सज्जन अपने गुण, सबके हित में दे॥
- जैसे फूल स्वयं न सूँघता, खुशबू जग को दे।
वैसे ही सज्जन अपने गुण, सबके हित में दे॥
- जैसे मधुमक्खी फूलों से, मधु लेती मुस्काय।
वैसे बुद्धिमान व्यक्ति, गुण सबमें अपनाय॥
- जैसे दीपक की लौ छोटी, फिर भी अँधेरा हरती।
वैसे छोटी-सी आशा भी, निराशा दूर करती॥
- जैसे समय किसी के लिए, रुकता कभी न जाए।
वैसे अवसर हाथ से निकले, फिर वापस न आए॥
- जैसे पथिक को राह दिखाए, अँधेरे में दीपक।
वैसे संकट में साथ निभाए, सच्चा मित्र नेक॥
दृष्टान्त अलंकार और उदाहरण अलंकार में प्रमुख अंतर-
