कर्मधारय समास- परिभाषा, प्रकार और उदहारण

कर्मधारय समास किसे कहते है?

परिभाषा – जिस समास में पूर्वपद और उत्तरपद में से उत्तरपद प्रधान होता है, तथा पूर्वपद उत्तरपद की विशेषता, उपमा या पहचान बताता है उसे कर्मधारय समास कहते है।

आसान शब्दों में – जिस समास में विशेषण – विशेष्य और उपमेय – उपमान का सम्बन्ध हो उसे कर्मधारय समास कहते है।

कर्मधारय समास की पहचान

  • इसमें उत्तरपद प्रधान होता है 
  • पूर्वपद, उत्तरपद की विशेषता बताता है 
  • दोनों पद मिलकर उत्तरपद के अर्थ को ही स्पष्ट करते है 
  • विग्रह करने पर अक्सर जो, है जो, के समान, रूपी आदि शब्द आते है 
  • इसमें प्रायः पहला पद विशेषण और दूसरा पद विशेष्य होता है 

कुछ महत्वपूर्ण तथ्य – 

विशेषण= जो कुछ कहा जाए

विशेष्य = जिसके बारे में कहा जाए

उपमेय = जिसकी तुलना की जाए

उपमान = जिससे तुलना की जाती है

उदाहरण

  • चरणकमल = कमल के समान चरण
  • प्राणप्रिय = प्राण के समान प्रिय
  • चंद्रमुख = चन्द्र के समान मुख
  • मृगनयन = मृग के समान नयन ( आँख )
  • देहलता = देह के समान लता
  • महापुरुष = महान है जो पुरुष
  • अधमरा = आधा है जो मरा
  • परमानंद = परम है जो आनंद
  • कमलनयन = कमल के समान नयन
  • लालमणि = लाल है जो मणि

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कर्मधारय समास के भेद

कर्मधारय समास के मुख्यतः 4 भेद होते है।

  1. विशेषणपूर्वपद कर्मधारय समास
  2. विशेष्यपूर्वपद कर्मधारय समास
  3. विशेषणोभय कर्मधारय समास
  4. विशेष्योभय कर्मधारय समास

1. विशेषणपूर्वपद कर्मधारय समास-

परिभाषा – जिस कर्मधारय समास में पूर्वपद विशेषण तथा उत्तरपद विशेष्य हो और दोनों पदों में समानाधिकरण संबंध हो, उसे विशेषणपूर्वपद कर्मधारय समास कहते हैं।

  • पूर्वपद = विशेषण
  • उत्तरपद = विशेष्य
  • विग्रह करने पर पहले पद के साथ ‘जो/जो है’ आदि लगाकर दूसरे पद की विशेषता स्पष्ट होती है।

सरल शब्दों में – जिस समास में पहला शब्द दूसरे शब्द की विशेषता बताए, वहाँ विशेषणपूर्वपद कर्मधारय समास होता है।

उदाहरण –

नीलकमल = नीला है जो कमल

  • नील = नीला – विशेषण
  • कमल = फूल का नाम – विशेष्य 
  • विग्रह = नीला है जो कमल
  • अतः नीलकमल विशेषणपूर्वपद कर्मधारय समास है

विशेषणपूर्वपद कर्मधारय समास के अन्य उदाहरण –

  • महापुरुष = महान है जो पुरुष
  • कालीमिर्च = काली है जो मिर्च
  • पीताम्बर = पीला है जो अम्बर ( वस्त्र )
  • लालकिला = लाल है जो किला
  • दुर्जन = दुर्गुण वला है जो जन

2. विशेष्यपूर्वपद कर्मधारय समास-

परिभाषा – जिस कर्मधारय समास में पूर्वपद विशेष्य तथा उत्तरपद विशेषण हो और दोनों पदों में समानाधिकरण संबंध हो, उसे विशेष्यपूर्वपद कर्मधारय समास कहते हैं।

  • पूर्वपद = विशेष्य
  • उत्तरपद = विशेषण

उदाहरण –

पुरुषोत्तम = उत्तम है जो पुरुष

  • पुरुष = विशेष्य
  • उत्तम = विशेषण
  • विग्रह = उत्तम है जो पुरुष
  • यहाँ पुरुष मुख्य पद है और उत्तम उसकी विशेषता बता रहा है, इसीलिए यह विशेष्यपूर्वपद कर्मधारय समास है।

विशेष्यपूर्वपद कर्मधारय समास के अन्य उदाहरण – 

  • घनश्याम = घन के समान श्याम
  • मुखचन्द्र = चन्द्रमा के समान मुख
  • नरश्रेष्ठ = श्रेष्ठ है जो नर
  • राजर्षि = राजा जो ऋषि है
  • सिंहश्रेष्ठ = श्रेष्ठ है जो सिंह

3. विशेषणोभय कर्मधारय समास-

परिभाषा – जिस कर्मधारय समास में पूर्वपद और उत्तरपद दोनों विशेषण हों तथा दोनों पद किसी एक ही विशेष्य की विशेषता प्रकट करें, उसे विशेषणोभय कर्मधारय समास कहते हैं।

  • पूर्वपद = विशेषण
  • पूर्वपद = विशेषण
  • तो यह विशेषणोभय कर्मधारय समास होगा

उदाहरण –

श्वेतश्याम = श्वेत और श्याम

  • श्वेत = विशेषण
  • श्याम = विशेषण
  • दोनों किसी वस्तु/व्यक्ति के रंग या रूप की विशेषता बताते हैं, इसीलिए यह विशेषणोभय कर्मधारय समास है।

विशेषणोभय कर्मधारय समास के अन्य उदाहरण – 

  • शीतोष्ण = शीत और उष्ण
  • लघुगुरु = लघु और गुरु
  • श्वेतश्याम = श्वेत और श्याम
  • मधुरकटु = मधुर और कटु
  • नूतनपुरातन = नूतन और पुरातन

4. विशेष्योभय कर्मधारय समास-

परिभाषा – जिस कर्मधारय समास में पूर्वपद और उत्तरपद दोनों विशेष्य हों तथा दोनों पदों में समानाधिकरण संबंध हो, उसे विशेष्योभय कर्मधारय समास कहते हैं।

  • पूर्वपद = विशेष्य
  • उत्तरपद = विशेष्य
  • तो यह विशेष्योभय कर्मधारय समास होगा

उदाहरण –

पुरुषसिंह = सिंह के समान पुरुष

  • पुरुष = विशेष्य
  • सिंह = विशेष्य
  • विग्रह = सिंह के समान पुरुष
  • यहाँ पुरुष और सिंह, दोनों संज्ञा/विशेष्य हैं, इसीलिए यह विशेष्योभय कर्मधारय समास है।

विशेष्योभय कर्मधारय समास के अन्य उदाहरण – 

  • नरसिंह = सिंह के समान नर
  • देवमानव = मानव के समान देव
  • नरव्याघ्र = व्याघ्र के समान नर
  • मुखकमल = कमल के समान मुख
  • नयनतारा = तारे के समान नयन

कर्मधारय समास FAQs

प्रश्न – कर्मधारय समास किसे कहते है? 

उत्तर- जिस समास में विशेषण – विशेष्य और उपमेय – उपमान का सम्बन्ध हो उसे कर्मधारय समास कहते है।

प्रश्न – कर्मधारय समास में कौन सा पद प्रधान होता है?

उत्तर- कर्मधारय समास में उत्तरपद प्रधान होता है

प्रश्न – कर्मधारय समास के मुखतः कितने भेद होते है?

उत्तर- मुखतः 4 भेद ( विशेषणपूर्वपद, विशेष्यपूर्वपद, विशेषणोभय और विशेष्योभय कर्मधारय ) होते है

प्रश्न – विशेषणपूर्वपद कर्मधारय समास में कौन सा पद विशेषण होता है?

उत्तर- इसमें पूर्वपद विशेषण तथा उत्तरपद विशेष्य होता है

प्रश्न – विशेष्योभय कर्मधारय समास में कौन सा पद विशेष्य होता है?

उत्तर- विशेष्योभय कर्मधारय समास पूर्वपद और उत्तरपद दोनों विशेष्य होते है

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