कर्मवाच्य किसे कहते हैं? परिभाषा, अर्थ, पहचान और उदाहरण, हिंदी व्याकरण
परिभाषा – जिस वाक्य में कर्म की प्रधानता होती है और क्रिया के द्वारा कर्म पर होने वाले कार्य का बोध होता है, उसे कर्मवाच्य कहते है।
सरल शब्दों में कहें तो जिस वाक्य में काम करने वाले कर्ता की अपेक्षा जिस पर काम किया जा रहा है, अर्थात् कर्म की प्रधानता होती है, उसे कर्मवाच्य कहते हैं।
उदाहरण –
- पत्र राम द्वारा लिखा जाता है।
यहाँ पत्र प्रधान हो गया इसीलिए यह कर्मवाच्य है।
कर्मवाच्य का अर्थ
कर्म + वाच्य = कर्मवाच्य
इसका अर्थ होता है की वाक्य में कर्म की प्रधानता दी गई है।
उदाहरण –
- खाना राम द्वारा पकाया जाता है।
कर्ता = मोहन
कर्म = खाना
पकाया = क्रिया
इस वाक्य में खाना प्रधान है इसीलिए यह कर्मवाच्य है।
कर्मवाच्य की पहचान कैसे करें?
वाक्य में कर्म प्रधान होता है, कर्ता के साथ ‘से‘ या ‘के द्वारा‘ लगा होता है, और क्रिया हमेशा सकर्मक तथा कर्म के लिंग व वचन के अनुसार होती है।
उदाहरण –
- पत्र राम द्वारा लिखा जाता है।
यहाँ मुख्य रूप से पत्र लिखे जाने की बात हो रही है, मतलब कि वाक्य में पत्र की प्रधानता है और पत्र कर्म है, तो यह कर्मवाच्य होगा।
कर्म = पत्र
पत्र = प्रधान है
तो यह वाक्य कर्मवाच्य है।
कर्मवाच्य में ‘द्वारा’ का प्रयोग
कर्मवाच्य के वाक्यों में अधिकतर द्वारा शब्द का प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण –
- पत्र राम द्वारा लिखा जाता है।
- खाना सीता द्वारा बनाया जाता है।
- पुस्तक शिक्षक द्वारा पढाई जाती है।
- योजना सरकार द्वारा चलाई जाती है।
- चोर पुलिस द्वारा पकड़ा जाता है।
कर्मवाच्य की पहचान केवल ‘द्वारा’ से नहीं करनी चाहिए। कुछ कर्मवाच्य वाक्यों में “द्वारा” का प्रयोग नहीं भी होता है।
कर्मवाच्य में कर्ता का प्रयोग
कर्मवाच्य में कर्ता मौजूद हो सकता है लेकिन वह प्रधान नही होता।
उदाहरण –
- क्रिकेट राहुल द्वारा खेला गया।
कर्ता = राहुल
कर्म = क्रिकेट
क्रिया = खेला
वाक्य में कर्ता, कर्म और क्रिया है लेकिन इसमें कर्म की प्रधानता है तो इसीलिए यह कर्मवाच्य है।
कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में परिवर्तन
कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य बनाते समय कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं।
उदाहरण –
राम पत्र लिखता है।
- कर्म को प्रधान बनाइए
- कर्ता के साथ ‘द्वारा’ का प्रयोग करें
पत्र राम के द्वारा लिखा जाता है।
कर्मवाच्य की मुख्य विशेषताएँ
- इसमें कर्म की प्रधानता होती है।
- कर्ता की अपेक्षा कर्म पर अधिक जोर दिया जाता है।
- सामान्यतः सकर्मक क्रिया का प्रयोग होता है।
- इसमें कर्म का होना आवश्यक होता है।
- कर्ता के साथ प्रायः ‘द्वारा’ का प्रयोग किया जाता है।
- क्रिया का संबंध सामान्यतः कर्म से होता है।
कर्मवाच्य के उदाहरण –
- सीता द्वारा खाना बनाया जाता है।
- मोहन द्वारा पुस्तक पढ़ी जाती है।
- पुलिस द्वारा चोर पकड़ा जाता है।
- किसान द्वारा खेत जोता जाता है।
- माँ द्वारा भोजन बनाया जाता है।
- डॉक्टर के द्वारा मरीज की जाँच की जाती है।
- कलाकार द्वारा सुन्दर चित्र बनाया जाता है।
- पुलिस द्वारा मामले की जाँच की जा रही है।
- न्यायालय द्वारा निर्णय सुनाया गया।
- विद्यार्थियों द्वारा प्रतियोगिता में भाग लिया गया।
कर्मवाच्य FAQs
प्रश्न- कर्मवाच्य किसे कहते है?
उत्तर- जिस वाक्य में काम करने वाले कर्ता की अपेक्षा जिस पर काम किया जा रहा है, अर्थात् कर्म की प्रधानता होती है, उसे कर्मवाच्य कहते हैं।
प्रश्न- कर्मवाच्य में किसकी प्रधानता होती है?
उत्तर- कर्मवाच्य में कर्म की प्रधानता होती है।
प्रश्न- सीता द्वारा खाना बनाया जाता है, इस वाक्य में कर्म क्या है?
उत्तर- खाना
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