श्लेष अलंकार किसे कहते है? अर्थ, परिभाषा, भेद,और उदाहरण – हिन्दी व्याकरण

श्लेष अलंकार का अर्थ –

श्लेष का सामान्य अर्थ होता है चिपकना 

अलंकार के सन्दर्भ में इसका अर्थ है कि एक ही शब्द में अनेक अर्थ जुड़े ( चिपके ) होते है

  • एक शब्द – अनेक अर्थ 

श्लेष अलंकार किसे कहते है-

परिभाषा – जहाँ कोई शब्द एक ही बार आए लेकिन उसका एक से अधिक अर्थ निकले, तो वहाँ श्लेष अलंकार होता है।

सरल शब्दों में – जहाँ एक शब्द अनेक अर्थो में प्रयुक्त होता है, उसे श्लेष अलंकार कहते है।

उदाहरण – 

सुबरन को खोजत फिरत, कवि, व्यभिचारी, चोर 

यहाँ सुबरन शब्द के अनेक अर्थ है –

  • सुबरन = सुंदर वर्ण / सुंदर रंग
  • सुबरन = सोना
  • सुबरन = सुंदर स्त्री

इस वाक्य में सुबरन शब्द के एक से अधिक अर्थ निकल रहे है, तो यह श्लेष अलंकार है

अन्य उदाहरण- 

  • वैभव से शोभित नगर, जलधि में कई चमकती नाव।
  • रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।
    पानी गए न ऊबरे, मोती, मानुष, चून॥
  • हरि ने हरि को हर लिया, हरि की महिमा कौन।

श्लेष अलंकार की मुख्य विशेषता-

  • यह अर्थालंकार का भेद है
  • इसमें एक ही शब्द के एक से अधिक अर्थ निकलते है
  • सभी अर्थ सार्थक और प्रसंगानुकूल होते हैं।
  • एक शब्द के अनेक अर्थ के कारण काव्य में चमत्कार उत्पन्न होता है
  • इसमें शब्द को सामान्यतः एक ही बार प्रयोग किया जाता है, लेकिन उससे अनेक अर्थों का बोध होता है।

श्लेष अलंकार के भेद- 

हिन्दी व्याकरण में श्लेष अलंकार के मुख्य दो ( 2 ) भेद होते है-

  1. अभंग श्लेष अलंकार
  2. सभंग श्लेष अलंकार

दोनों को विस्तार से समझते है-

1. अभंग श्लेष अलंकार-

यहाँ अभंग का अर्थ है = बिना टूटे हुए या बिना किसी परिवर्तन के।

परिभाषा – जिन शब्दों को बिना तोड़े या उसके मूल रूप में रखते हुए अनेक अर्थ निकलते हो तो वहाँ अभंग श्लेष अलंकार होता है।

अर्थात् इसमें शब्द को विभाजित नहीं किया जाता।

उदाहरण – 

रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।
पानी गये न ऊबरै, मोती, मानुस, चून।।

इस पंक्ति में पानी के अनेक अर्थ है –

पानी = कांति, सम्मान और जल

यहाँ पानी शब्द को तोड़ा नहीं गया है। इसी एक शब्द से अलग-अलग अर्थ प्राप्त होते हैं। इसीलिए अभंग श्लेष अलंकार है।

अन्य उदाहरण – 

  • कर कमल से दान देकर, कर से मुक्त हुआ।
  • चिर जियो जोरी जुरे, क्यों न स्नेह गंभीर। को घटिए वृषभातनुजा, वे हलधर के वीर।
  • खर सुकोमल मंजु, दोषरहित दूषण सहित

2. सभंग श्लेष अलंकार-

परिभाषा – जब शब्द को अलग-अलग रूपों में विभाजित करने या उसकी संरचना बदलकर अलग अर्थ प्राप्त किए जाते हैं, तब सभंग श्लेष अलंकार होता है।

अर्थात् शब्द के खंड करने पर अलग-अलग अर्थ प्राप्त होते हैं।

यहाँ सभंग = शब्द का भंग/विभाजन करके अलग अर्थ निकालना।

उदाहरण – 

सखर सुकोमल मंजु, दोषरहित दूषण सहित।

यहाँ सखर का अर्थ कठोर तथा दूसरा अर्थ खरदूषण के साथ (स+खर) है। यह दूसरा अर्थ ‘सखर’ को तोड़कर किया गया है, इसलिए यहाँ सभंग श्लेष अलंकार है।

अन्य उदाहरण – 

  • बलिहारी नृप कूप की, गुण बिन बूंद न देई।
  • को घटि ये वृषभानुजा, वे हलधर के बीर।

अभंग और सभंग श्लेष अलंकार में अंतर-

श्लेष अलंकार में एक ही शब्द या पद से एक से अधिक अर्थ प्रकट होते हैं। इसके आधार पर श्लेष के अभंग और सभंग दो भेद माने जाते हैं। नीचे चार्ट में इन दोनों के अंतर को विस्तार से समझाया गया है-

आधार अभंग श्लेष सभंग श्लेष
1. अर्थ शब्द को बिना तोड़े ही उसके अनेक अर्थ निकलते हैं। शब्द को तोड़ने या अलग-अलग खंड करने पर अलग-अलग अर्थ निकलते हैं।
2. शब्द की स्थिति शब्द अखंड रूप में रहता है। शब्द को खंडित/विभाजित करके अर्थ निकाला जाता है।
3. शब्द में परिवर्तन शब्द के मूल रूप में कोई परिवर्तन नहीं होता। शब्द के विभाजन से अलग-अलग अर्थ प्राप्त होते हैं।
4. पहचान एक शब्द → अनेक अर्थ, लेकिन शब्द नहीं टूटता। एक शब्द → अलग-अलग खंड → अलग-अलग अर्थ।
5. उदाहरण “कर” → हाथ + टैक्स शब्द का विभाजन करके दो अर्थ प्राप्त करना।
6. मुख्य आधार अखंड शब्द खंडित शब्द

 

श्लेष अलंकार FAQs-

प्रश्न- श्लेष अलंकार किसे कहते है?

उत्तर- जहाँ एक शब्द अनेक अर्थो में प्रयुक्त होता है, उसे श्लेष अलंकार कहते है

प्रश्न- श्लेष अलंकार में श्लेष शब्द का क्या अर्थ होता है?

उत्तर- श्लेष का अर्थ चिपकना या चिपका हुआ होता है

प्रश्न- श्लेष अलंकार के मुख्यतः कितने भेद होते है?

उत्तर- श्लेष अलंकार के मुख्यतः दो ( 2 ) भेद होते है

प्रश्न- श्लेष अलंकार के किस भेद में शब्द को बिना विभाजित किये उसका अर्थ निकलता है?

उत्तर- अभंग श्लेष अलंकार

प्रश्न- श्लेष अलंकार के किस भेद में शब्द को विभाजित करने पर उसका अर्थ निकलता है?

उत्तर- सभंग श्लेष अलंकार

 

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