भ्रांतिमान अलंकार किसे कहते है? अर्थ, परिभाषा, और उदाहरण – हिन्दी व्याकरण

भ्रांतिमान अलंकार किसे कहते है?

भ्रांतिमान दो शब्दों भ्रांति + मान से मिलकर बना है

  • भ्रांति = भ्रम, गलत धारणा या मिथ्या ज्ञान’
  • मान = मानना या समझना

अर्थात् भ्रांतिमान का अर्थ है- किसी वस्तु को भ्रमवश दूसरी वस्तु समझ लेना।

परिभाषा- जब उपमेय में उपमान के होने का भ्रम हो जाए या जहाँ एक वस्तु ( उपमेय ) को देखकर दूसरी वस्तु ( उपमान ) का भ्रम हो जाए वहाँ भ्रांतिमान अलंकार होता है।

सरल शब्दों में – जब किसी वस्तु में दूसरी वस्तु की समानता देखकर उसे गलती से वही दूसरी वस्तु समझ लिया जाए, वहाँ भ्रांतिमान अलंकार होता है।

  • उपमेय = जिसकी तुलना की जाए 
  • उपमान = जिससे तुलना की जाए 

उदाहरण- 

मुख को चंद्रमा समझकर,
चकोर उसके पास जा बैठा।

इस वाक्य में मुख उपमेय है और चंद्रमा उपमान है। मुख में चन्द्रमा जैसी समानता होने के कारण उसे चंद्रमा समझ लिया गया, इसलिए यह भ्रांतिमान अलंकार है।

भ्रांतिमान अलंकार की विशेषता-

  • यह अर्थालंकार है
  • इसमें समानता के कारण भ्रम उत्पन्न होता है
  • इसमें उपमेय को उपमान समझ लिया जाता है
  • उपमेय और उपमान में सादृश्य होना आवश्यक है
  • इसमें केवल समानता बताना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भ्रम का उत्पन्न होना आवश्यक है।
  • इसमें भ्रम के कारण वास्तविक वस्तु का ज्ञान होता है
  • इसमें एक वस्तु को दूसरी वस्तु मान लेने का भाव प्रमुख होता है
  • इसमें कवि की कल्पना के कारण काव्य में चमत्कार और रोचकता उत्पन्न होती है

भ्रांतिमान अलंकार के उदाहरण-

  • मुख को चाँद समझकर,
    चकोर पास चला आया।
  • ओस-बूँद को मोती जान,
    बालक उसे उठाने लगा।
  • रेत पर चमकती सीप को,
    चाँदी समझकर उठा लिया।।
  • दूर चमकते दीप को तारा जान,
    पथिक आकाश निहारने लगा।
  • कमल को मुख समझ बैठा भ्रमर,
    मधुर रस पीने आया।
  • मुख की चमक देखकर बालक,
    उसे चंद्रमा समझ बैठा।
  • चाँदी-सी चमकी नदी की धार,
    उसे चाँदी की पट्टी समझा।
  • दूर खड़ा वृक्ष देखकर,
    यात्री उसे मनुष्य समझ बैठा।
  • चाँदनी में खिला श्वेत फूल,
    उसे चंद्रमा समझ बैठा भ्रमर।
  • ताल में कमल को मुख समझ,
    भ्रमर उसके पास मंडराया।
  • नीले जल को नीलम जान,
    बालक उसमें हाथ डालने लगा।
  • कपोलों की लालिमा देखकर,
    गुलाब उन्हें समझ बैठा भ्रमर।
  • सूर्योदय की लालिमा को देखकर,
    अग्नि समझा बालक ने।
  • दूर चमकती हिम-चोटी को,
    बादल समझ लिया चरवाहे ने।
  • पीले पत्ते को स्वर्ण समझ,
    बालक ने उसे उठा लिया।
  • कुहरे में खड़े पेड़ को देखकर,
    हाथी समझकर घोड़ा डर गया।
  • सफेद वस्त्रों में उसे देखकर,
    हंस समझ बैठा वनवासी।

भ्रांतिमान अलंकार और संदेह अलंकार में अंतर

संदेह अलंकार और भ्रांतिमान अलंकार दोनों में दो वस्तुओं के बीच समानता के कारण विशेष स्थिति उत्पन्न होती है। लेकिन संदेह में अनिश्चितता और भ्रांतिमान में गलत पहचान होती है।

आधार संदेह अलंकार भ्रांतिमान अलंकार
अर्थ किसी वस्तु के वास्तविक स्वरूप को लेकर संदेह होना किसी वस्तु को दूसरी वस्तु समझ लेना
मुख्य भाव दुविधा / शंका भ्रम / मिथ्या ज्ञान
निर्णय कोई निश्चित निर्णय नहीं होता। गलत निर्णय हो जाता है।
स्थिति “यह क्या है?” की स्थिति रहती है। “यह वही है।” ऐसा मान लिया जाता है।
वस्तुओं की संख्या दो या अधिक वस्तुओं में से किसी एक के होने की संभावना रहती है। एक वस्तु को दूसरी वस्तु ही मान लिया जाता है।
समानता समानता देखकर संदेह उत्पन्न होता है। समानता के कारण भ्रम उत्पन्न होता है।
उदाहरण “यह चाँद है या उसका मुखड़ा?” “उसके मुख को चाँद समझ बैठा।”

उदाहरण से समझते है-

भ्रांतिमान अलंकार- 

उसके मुख को चाँद समझ बैठा।

यहाँ कवि ने मुख को चाँद ही समझ लिया, जबकि वह वास्तव में मुख है। इसलिए यह भ्रांतिमान अलंकार है।

संदेह अलंकार-

यह चाँद है या उसका मुखड़ा,
समझ न पाऊँ मैं।

यहाँ कवि निश्चित नहीं कर पा रहा कि वह चाँद है या मुख। इसलिए यह संदेह अलंकार है।

भ्रांतिमान अलंकार FAQs-

प्रश्न- भ्रांतिमान अलंकार किसे कहते है?

उत्तर- जहाँ किसी वस्तु को देखकर विशेष समानता के कारण किसी दूसरी वस्तु का निश्चयात्मक भ्रम हो जाता है, उसे भ्रांतिमान अलंकार कहते है

प्रश्न- भ्रांतिमान का क्या अर्थ होता है?

उत्तर- भ्रांतिमान का अर्थ है किसी वस्तु को भ्रमवश दूसरी वस्तु समझ लेना

प्रश्न- भ्रांतिमान अलंकार और संदेह अलंकार क्या अंतर है?

उत्तर- संदेह अलंकार में मन का संशय अंत तक बना रहता है, जबकि भ्रांतिमान अलंकार में भ्रम के कारण एक वस्तु को दूसरी वस्तु मानकर उसी के अनुसार कार्य कर लिया जाता है

 

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