संदेह अलंकार किसे कहते है? अर्थ, परिभाषा, भेद, और उदाहरण
संदेह अलंकार किसे कहते है?
संदेह का अर्थ है = शंका दुविधा या किसी बात के निश्चित न होने की स्थिति
परिभाषा – जहाँ किसी वस्तु या व्यक्ति के रूप को देखकर उसके संबंध में यह निश्चित न हो सके कि वह वास्तव में क्या है और कवि के मन में दो या अधिक वस्तुओं के होने की संभावना उत्पन्न हो, वहाँ संदेह अलंकार होता है।
सरल शब्दों में- जहाँ किसी व्यक्ति या वस्तु को देखकर संशय बना रहे अर्थात निश्चय न हो सके वहाँ संदेह अलंकार होता है।
पहचान – संदेह अलंकार के उदाहरण में प्रायः या, अथवा, कि, कै, कैधों आदि शब्दों का प्रयोग हुआ होता है।
उदाहरण –
सारी रात चाँद को देखता रहा,
यह चाँद है या उसका मुखड़ा।
यहाँ कवि को संदेह है कि सामने दिखाई देने वाला चाँद है या किसी का सुंदर मुख। इसलिए यहाँ संदेह अलंकार है।
संदेह अलंकार की मुख्य विशेषता-
- संदेह अलंकार अर्थालंकार के अंतर्गत आता है, क्योंकि इसमें चमत्कार शब्दों के बजाय अर्थ के कारण उत्पन्न होता है।
- इसमें किसी वस्तु, व्यक्ति या दृश्य के वास्तविक स्वरूप को लेकर मन में संदेह उत्पन्न होता है।
- किसी एक वस्तु के स्थान पर दो या दो से अधिक वस्तुओं की संभावना दिखाई जाती है।
- यह निश्चित नहीं हो पाता कि सामने दिखाई देने वाली वस्तु वास्तव में क्या है।
- प्रायः दो वस्तुओं में इतनी समानता होती है कि उनमें अंतर करना कठिन हो जाता है।
- कवि अपनी कल्पना के माध्यम से एक वस्तु को दूसरी वस्तु के समान मानकर संदेह उत्पन्न करता है।
- इसमें किंवा, केंधो, कि, या, कै, या अथवा जैसे शब्दों का प्रयोग होता है।
संदेह अलंकार के उदाहरण –
- देखत ही मन में उठी शंका,
यह चंद्रमा है या मुख उसका। - नील गगन में दूर चमकता,
यह तारा है या दीपक कोई? - पीले वस्त्र धरे वह आया,
मानो सूर्य है या स्वयं प्रभाकर। - चमकत कैंधों सूर सूरजा दुधार किंधौ, सहर सतारा को सितारा चमकत है ?
- सारी बीच नारी है कि नारी बीच सारी है।
सारी ही की नारी है कि नारी ही की सारी है।। - ये है सरस ओस की बूँदें या हैं मंजुल मोती।।
- यह चाँद है या उसका मुखड़ा, समझ न पाऊँ मैं।
- यह कमल खिला है या उसका मुख मुस्काया है?
- बगिया में फूल खिला है या बालिका मुस्काई है?
- दूर पर्वत पर धुआँ उठा या बादल नीचे उतर आया?
- यह हिरणी की चाल है या कोई सुंदरी चली जा रही है?
- यह मधुर स्वर कोयल का है या किसी सुंदरी का गीत?
- यह चाँद है या उसका मुखड़ा, समझ न पाऊँ मैं।
संदेह अलंकार और भ्रांतिमान अलंकार में अंतर-
संदेह अलंकार और भ्रांतिमान अलंकार दोनों में दो वस्तुओं के बीच समानता दिखाई देती है, लेकिन दोनों में मुख्य अंतर संदेह और भ्रम का है।
| आधार | संदेह अलंकार | भ्रांतिमान अलंकार |
|---|---|---|
| 1. अर्थ | किसी वस्तु के वास्तविक रूप को लेकर संदेह उत्पन्न होता है। | एक वस्तु को दूसरी वस्तु समझ लेने का भ्रम होता है। |
| 2. स्थिति | यह निश्चित नहीं होता कि वस्तु क्या है। | कवि या पात्र एक वस्तु को दूसरी मान लेता है। |
| 3. निश्चितता | अनिश्चितता रहती है। | गलत निश्चितता होती है। |
| 4. मन की अवस्था | मन में दुविधा रहती है—यह है या वह? | मन में भ्रम होता है—यह वही है। |
| 5. संकेत शब्द | प्रायः या, अथवा, कदाचित, क्या आदि शब्द मिल सकते हैं। | प्रायः समझना, मानना, जानना, भ्रम होना आदि भाव दिखाई देते हैं। |
| 6. उदाहरण | “यह चाँद है या उसका मुखड़ा?” | “उसके मुख को चाँद समझ लिया।” |
| 7. मुख्य भाव | संदेह | भ्रम |
दोनों के उदाहरण से समझते है-
संदेह अलंकार-
यह चाँद है या उसका मुखड़ा, समझ न पाऊँ मैं। यहाँ कवि निश्चित नही है कि वह चाँद है या मुखड़ा, इसीलिए यह संदेह अलंकार का उदाहरण है।
भ्रांतिमान अलंकार-
उसके मुख को चाँद समझ बैठा। यहाँ कवि ने मुख को चाँद मान लिया, जबकि वह चाँद नही है इसीलिए यह भ्रांतिमान अलंकार का उदाहरण है।
संदेह अलंकार FAQs-
प्रश्न- संदेह अलंकार किसे कहते है?
उत्तर- जब किसी वस्तु को देखकर उसके वास्तविक रूप के बारे में शंका या दुविधा पैदा हो जाए, तो वहाँ संदेह अलंकार होता है।
प्रश्न- संदेह अलंकार में संदेह का क्या अर्थ है?
उत्तर- संदेह अलंकार का अर्थ शंका दुविधा या किसी बात के निश्चित न होने की स्थिति
प्रश्न- संदेह अलंकार और भ्रांतिमान अलंकार में क्या अंतर है?
उत्तर- संदेह और भ्रांतिमान अलंकार दोनों में दो वस्तुओं के बीच समानता के कारण भ्रम जैसी स्थिति बनती है, लेकिन दोनों में मूल अंतर यह है कि संदेह में निर्णय नहीं हो पाता, जबकि भ्रांतिमान में एक वस्तु को दूसरी वस्तु समझ लिया जाता है।
