लोकोक्ति किसे कहते है? अर्थ और उदाहरण
लोकोक्ति किसे कहते है-
परिभाषा – लोक में प्रचलित उक्ति या कथन जिसका मूल अर्थ बना रहता है और स्वतंत्र रूप से उसका उपयोग भी किया जाता है, उसे लोकोक्ति कहते है। इसे कहावत भी कहते है।
सरल शब्दों में – जिस प्रसिद्द कथन में लोगो के अनुभव और सीख छिपी होती है, उसे लोकोक्ति कहते है।
लोकोक्ति का अर्थ-
लोकोक्ति शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है = लोक + उक्ति
- लोक = लोग / जनता
- उक्ति = कही गई बात
अर्थात लोगों द्वारा लंबे समय से कही और प्रचलित की गई अनुभवपूर्ण बात को लोकोक्ति कहते हैं।
लोकोक्ति की प्रमुख विशेषताएँ-
- लोकोक्ति लोक – अनुभव पर आधारित होती है
- लोकोक्ति अपने आप में पूरा वाक्य/ कथन होता है
- लोकोक्ति में अभिधेयार्थ और व्यंगार्थ दोनों होते है
- लोकोक्ति में कोई शिक्षा, नीति या जीवन – सत्य छिपा होता है
- लोकोक्ति भाषा को प्रभावशाली और रोचक बनाती है
- इसमें कम शब्दों में गहरी बात कही जाती है
- लोकोक्ति का प्रयोग किसी विशेष परिस्थिति को समझाने के लिए किया जाता है
लोकोक्ति और मुहावरे में अंतर –
मुहावरा और लोकोक्ति दोनों हिन्दी भाषा को प्रभावशाली और रोचक बनाते है। लेकिन मुहावरा और लोकोक्ति में कुछ महत्वपूर्ण अंतर होता है जो नीचे दिए गया चार्ट में दर्शाया गया है।
| आधार | मुहावरा | लोकोक्ति |
|---|---|---|
| अर्थ | विशेष या लाक्षणिक अर्थ प्रकट करता है। | किसी अनुभव, सत्य, नीति या शिक्षा को प्रकट करती है। |
| स्वरूप | सामान्यतः वाक्यांश होता है। | सामान्यतः पूर्ण वाक्य होती है। |
| प्रयोग | वाक्य के अंग के रूप में किया जाता है। | स्वतंत्र रूप से भी प्रयोग की जा सकती है। |
| उद्देश्य | भाषा को रोचक और प्रभावशाली बनाना। | किसी अनुभव या जीवन-सत्य को समझाना। |
| अर्थ की प्रकृति | शाब्दिक अर्थ से अलग लाक्षणिक अर्थ होता है। | प्रायः कोई सीख, नीति या अनुभव व्यक्त करती है। |
| वाक्य पर निर्भरता | अपना पूरा भाव स्पष्ट करने के लिए वाक्य की आवश्यकता होती है। | स्वयं में पूरा भाव व्यक्त कर सकती है। |
| उदाहरण | नाक में दम करना — बहुत परेशान करना। | जैसी करनी वैसी भरनी — कर्म के अनुसार फल मिलता है। |
| एक अन्य उदाहरण | हाथ-पाँव फूलना — घबरा जाना। | अधजल गगरी छलकत जाए — कम ज्ञान वाला अधिक दिखावा करता है। |
मुहावरा जहाँ भाषा को गति और चमत्कार प्रदान करने वाला एक मध्यम है, वहीं लोकोक्ति लोक – संस्कृति और जीवन के अनुभवो का जीवंत दस्तावेज है।
लोकोक्ति के प्रमुख उदाहरण –
1. जैसी करनी वैसी भरनी।
अर्थ: मनुष्य को अपने कर्मों का फल अवश्य मिलता है।
उदाहरण: उसने हमेशा दूसरों को परेशान किया, इसलिए आज कोई उसकी मदद नहीं कर रहा।
2. नाच न जाने, आँगन टेढ़ा।
अर्थ: अपनी कमी का दोष दूसरों पर लगाना।
उदाहरण: परीक्षा में कम अंक आने पर वह अपनी गलती मानने के बजाय शिक्षक को दोष देने लगा।
3. अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत।
अर्थ: समय निकल जाने के बाद पछताने से कोई लाभ नहीं होता।
उदाहरण: उसने परीक्षा से पहले पढ़ाई नहीं की और अब असफल होने पर पछता रहा है।
4. अधजल गगरी छलकत जाए।
अर्थ: कम ज्ञान वाला व्यक्ति अधिक दिखावा करता है।
उदाहरण: उसे विषय की थोड़ी जानकारी है, फिर भी वह सबके सामने बहुत ज्ञान की बातें करता है।
5. दूर के ढोल सुहावने।
अर्थ: दूर की चीजें अच्छी लगती हैं, लेकिन पास आने पर उनकी वास्तविकता पता चलती है।
उदाहरण: उसे दूसरे शहर की नौकरी बहुत अच्छी लगती थी, लेकिन वहाँ जाकर उसे कई परेशानियों का सामना करना पड़ा।
6. एक अनार सौ बीमार।
अर्थ: वस्तु कम और उसे पाने वाले बहुत अधिक होना।
उदाहरण: इस कॉलेज में सीटें बहुत कम हैं, लेकिन आवेदन करने वाले हजारों विद्यार्थी हैं।
7. अंत भला तो सब भला।
अर्थ: परिणाम अच्छा हो तो पहले की कठिनाइयाँ अधिक महत्वपूर्ण नहीं रहतीं।
उदाहरण: यात्रा में हमें कई परेशानियाँ हुईं, लेकिन अंत में हम सुरक्षित घर पहुँच गए।
8. घर की मुर्गी दाल बराबर।
अर्थ: अपने पास की वस्तु या व्यक्ति का महत्व कम समझना।
उदाहरण: वह दूसरे शिक्षकों की बहुत प्रशंसा करता है, लेकिन अपने पिता की सलाह को महत्व नहीं देता।
9. जिसकी लाठी उसकी भैंस।
अर्थ: शक्तिशाली व्यक्ति का अधिकार चलता है।
उदाहरण: गाँव के विवाद में ताकतवर व्यक्ति ने अपनी बात सभी पर थोप दी।
10. दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँककर पीता है।
अर्थ: एक बार नुकसान उठाने वाला व्यक्ति भविष्य में बहुत सावधान रहता है।
उदाहरण: एक बार ऑनलाइन ठगी का शिकार होने के बाद अब वह किसी भी वेबसाइट पर भुगतान करने से पहले पूरी जाँच करता है।
11. आम के आम, गुठलियों के दाम।
अर्थ: एक ही काम से दोहरा लाभ होना।
उदाहरण: उसने आम खाए और उनकी गुठलियाँ भी बेच दीं। आम के आम, गुठलियों के दाम।
12. ऊँची दुकान, फीका पकवान।
अर्थ: दिखावा अधिक होना, लेकिन वास्तविक गुणवत्ता कम होना।
उदाहरण: दुकान बहुत बड़ी और आकर्षक थी, लेकिन वहाँ का सामान अच्छा नहीं था।
13. खोदा पहाड़, निकली चुहिया।
अर्थ: बहुत प्रयास करने पर बहुत कम परिणाम मिलना।
उदाहरण: कंपनी ने कार्यक्रम के लिए महीनों तैयारी की, लेकिन उसमें बहुत कम लोग आए। खोदा पहाड़, निकली चुहिया।
14. बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद।
अर्थ: अयोग्य व्यक्ति अच्छी वस्तु का मूल्य नहीं समझता।
उदाहरण: उसे महँगी किताब दी गई, लेकिन उसने उसे पढ़ने के बजाय फेंक दिया।
15. चोर की दाढ़ी में तिनका।
अर्थ: दोषी व्यक्ति स्वयं ही आशंकित रहता है।
उदाहरण: चोरी की बात सुनते ही वह बिना पूछे अपनी सफाई देने लगा।
16. नाम बड़े और दर्शन छोटे।
अर्थ: प्रसिद्धि या नाम बहुत बड़ा होना, लेकिन योग्यता कम होना।
उदाहरण: उस प्रसिद्ध दुकान की बहुत चर्चा थी, लेकिन वहाँ का खाना बिल्कुल अच्छा नहीं था।
17. थोथा चना बाजे घना।
अर्थ: कम ज्ञान वाला व्यक्ति अधिक बोलता है।
उदाहरण: उसे विषय की जानकारी बहुत कम है, फिर भी वह सबसे अधिक बोलता है।
18. मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।
अर्थ: सफलता के लिए आत्मविश्वास और मजबूत मनोबल आवश्यक है।
उदाहरण: कठिन परीक्षा देखकर भी उसने हिम्मत नहीं छोड़ी और अच्छे अंक प्राप्त किए।
19. जहाँ चाह, वहाँ राह।
अर्थ: दृढ़ इच्छा और प्रयास से रास्ता अवश्य मिल जाता है।
उदाहरण: गरीब होने के बावजूद उसने मेहनत करके अपनी पढ़ाई पूरी की।
20. एक हाथ से ताली नहीं बजती।
अर्थ: किसी विवाद में केवल एक पक्ष की ही गलती नहीं होती।
उदाहरण: दोनों भाइयों ने एक-दूसरे से झगड़ा किया, इसलिए गलती दोनों की थी।
21. घर का भेदी लंका ढाए।
अर्थ: अपना ही व्यक्ति घर या संस्था को सबसे अधिक नुकसान पहुँचा सकता है।
उदाहरण: कंपनी की अंदरूनी जानकारी कर्मचारी ने बाहर बता दी।
22. बोया पेड़ बबूल का, आम कहाँ से होय।
अर्थ: गलत कर्म करने पर अच्छे परिणाम की आशा नहीं करनी चाहिए।
उदाहरण: उसने पूरे साल पढ़ाई नहीं की, तो अच्छे अंक कैसे आएँगे?
23. तेते पाँव पसारिए, जेती लंबी सौर।
अर्थ: अपनी आय या सामर्थ्य के अनुसार ही खर्च करना चाहिए।
उदाहरण: कम आमदनी होने के बावजूद महँगी चीजें खरीदना उचित नहीं है।
24. विनाश काले विपरीत बुद्धि।
अर्थ: बुरा समय आने पर व्यक्ति की बुद्धि विपरीत दिशा में काम करने लगती है।
उदाहरण: सभी के समझाने के बाद भी उसने गलत निर्णय लिया और अपना नुकसान कर बैठा।
25. सौ सुनार की, एक लोहार की।
अर्थ: एक शक्तिशाली कार्य कई छोटे-छोटे कार्यों पर भारी पड़ता है।
उदाहरण: वह कई दिनों से बहस कर रहा था, लेकिन प्रबंधक के एक निर्णय से पूरा मामला समाप्त हो गया।
26. नेकी कर, दरिया में डाल।
अर्थ: भलाई करके उसका अहसान नहीं जताना चाहिए।
उदाहरण: उसने गरीब विद्यार्थी की फीस भर दी और किसी को इसकी जानकारी भी नहीं दी।
27. देर आए, दुरुस्त आए।
अर्थ: देर से आना ठीक है, यदि अंत में सही काम किया जाए।
उदाहरण: उसने देर से ही सही, लेकिन अपनी गलती स्वीकार कर ली।
28. जाके पैर न फटी बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई।
अर्थ: जिसने स्वयं दुख नहीं सहा, वह दूसरे के दुख को ठीक से नहीं समझ सकता।
उदाहरण: अमीर व्यक्ति गरीबों की परेशानियों को नहीं समझता, क्योंकि उसने कभी गरीबी नहीं देखी।
29. होनहार बिरवान के होत चिकने पात।
अर्थ: योग्य व्यक्ति की प्रतिभा बचपन से ही दिखाई देने लगती है।
उदाहरण: राहुल बचपन से ही पढ़ाई में बहुत तेज था और आज वह एक सफल अधिकारी है।
30. जैसी संगति वैसी रंगति।
अर्थ: व्यक्ति पर उसकी संगति का प्रभाव पड़ता है।
उदाहरण: अच्छे दोस्तों के साथ रहने से उसकी आदतों में भी सुधार आया।
