हास्य रस किसे कहते है? परिभाषा, भेद और उदाहरण – हिन्दी व्याकरण
हास्य रस किसे कहते है?
परिभाषा– किसी विकृत या असामान्य हाव भाव, चेष्टा, क्रिया, वार्तालाप, व्यक्ति तथा स्थिति का ऐसा चित्रण जिसमे हास्य उत्पन्न होता है, उसे हास्य रस कहते है।
सरल शब्दों में – जिस रचना को पढ़कर या सुनकर हँसी आए, वहाँ हास्य रस होता है।
- हास्य रस का स्थायी भाव हास होता है –
किसी व्यक्ति या परिस्थिति की विचित्रता, असंगति, मजाक या मनोरंजक व्यवहार को देखकर मन में जो हँसी उत्पन्न होती है, वही हास्य रस का स्थायी भाव है।
हास्य रस के प्रमुख चार अंग होते है-
- स्थायी भाव- जब किसी व्यक्ति, वस्तु, वेशभूषा, व्यवहार, हाव-भाव, कथन या परिस्थिति की विचित्रता देखकर मन में हँसी या मुस्कान उत्पन्न होती है, तो उस भाव को हास कहते हैं।
- विभाव- जिन व्यक्तियों, वस्तुओं, वेशभूषा, बातों या हरकतों को देखकर मन में हँसी पैदा होती है, उन्हें विभाव कहते हैं।इसके दो भेद हैं—आलंबन विभाव – जिस व्यक्ति या वस्तु को देखकर हँसी आए, उसे आलंबन कहते हैं।
उद्दीपन विभाव – जो वेशभूषा, हरकतें या परिस्थितियाँ हँसी को बढ़ाएँ, उन्हें उद्दीपन कहते हैं। - अनुभाव – स्थायी भाव के जागृत होने के बाद शरीर या व्यवहार में जो बाहरी परिवर्तन दिखाई देते हैं, उन्हें अनुभाव कहते हैं।
- संचारी भाव – जो भाव थोड़े समय के लिए उत्पन्न होकर स्थायी भाव को मजबूत करते हैं, उन्हें संचारी भाव कहते हैं।
उदाहरण-
मूँछ बढ़ाए घूमते थे, मूँछों पर था बड़ा गुमान,
हवा चली तो मूँछ उड़ गई, रह गया केवल अभिमान।
इस वाक्य में व्यक्ति की मूँछ और उसके अभिमान की हास्यास्पद स्थिति के कारण हँसी उत्पन्न होती है, इसलिए यहाँ हास्य रस है।
हास्य रस के भेद-
विकास या प्रकार के आधार पर हास्य रस के छह भेद होते है-
- संस्कृत नाट्यशास्त्र और हिंदी साहित्य में हास्य के ये छह भेद बताए गए हैं
- स्मिति हास्य
- हसित हास्य
- विहसित हास्य
- अपहसित हास्य
- अवहसित हास्य
- अतिहसित हास्य
इन सभी को विस्तार से समझते है –
1. स्मिति हास्य रस –
जब किसी व्यक्ति के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान दिखाई देती है और वह जोर से नही हँसता तो वहाँ स्मिति हास्य होता है।
हल्की या धीमी मुस्कान को स्मित हास्य कहते हैं।
उदाहरण –
मुख पर आई मंद मुस्कान,
सुनकर सखी की मीठी बात।
इस वाक्य में हल्की मुस्कान दिखाई दे रही है, इसलिए इसे स्मित हास्य कहा जाएगा।
2. हसित हास्य-
जब किसी व्यक्ति के चेहरे पर सामान्य रूप से हँसी दिखाई देती है और वह हल्के स्वर में हँसता है, तो उसे हसित हास्य कहते हैं।
उदाहरण-
सखी की बात सुनकर वह हँस पड़ा,
मुख पर हँसी खिल उठी।
यहाँ सामान्य हँसी दिखाई दे रही है, इसलिए इसे हसित हास्य कहा जाएगा।
3. विहसित हास्य-
जब किसी व्यक्ति को किसी मजेदार बात, घटना या हरकत पर खुलकर हँसी आती है, लेकिन हँसी बहुत अधिक नही होती है तो उसे विहसित हास्य कहते है।
उदाहरण –
मजेदार बात सुनकर सखियाँ हँस पड़ीं,
हँसी से उनके मुख खिल उठे।
इस वाक्य में खुलकर हँसने का भाव है, इसलिए इसे विहसित हास्य कहा जाएगा।
4. अपहसित हास्य-
जब व्यक्ति बहुत जोर से और अनियंत्रित होकर हँसे, तो उसे अपहसित हास्य कहते हैं।
उदाहरण –
चुटकुला सुनकर सब हँसे जोर-जोर,
हँसते-हँसते आँखों से निकले नीर।
इस वाक्य में बहुत अधिक और अनियंत्रित हँसी दिखाई दे रहे है, इसलिए यह अपहसित हास्य का उदाहरण है।
5. अवहसित हास्य-
जब एक व्यक्ति को हँसता देखकर दूसरे व्यक्ति भी हँसने लगें, तो उसे अवहसित हास्य कहते हैं।
उदाहरण –
एक सखी को हँसते देख,
सब सखियाँ हँसने लगीं।
इस वाक्य में एक व्यक्ति की हँसी को देखकर दुसरे भी हँसने लगे अतः यह अवहसित हास्य है।
6.अतिहसित हास्य-
जब व्यक्ति बहुत ज्यादा, जोर से और अनियंत्रित होकर हँसे, तो उसे अतिहसित हास्य कहते हैं।
उदाहरण-
सुनकर चुटकुला ऐसा मजेदार,
हँस पड़ा वह बार-बार।
हँसते-हँसते पेट पकड़ लिया,
खुद को भी न संभाल सका।
इस वाक्य में अत्यधिक और अनियंत्रित हँसी दिखाई दे रही है, इसलिए इसे अतिहसित हास्य कहा जायेगा।
हास्य रस के अन्य प्रमुख उदाहरण –
- विन्ध्य के वासी उदासी तपोव्रत धारी महा विनु नारि दुखारे। गौतम तीय तरी तुलसी सो कथा सुनि भे मुनि वृन्द सुखारे।
है वह शिला तब चन्द्रमुखी परसे पद मंजुल कंज तिहारे। कीन्हीं भली रघुनायक जू करुणा करि कानन को पगु धारे।। - शादी से पहले कसम-कसमें खाते हैं, शादी के बाद बस सर खुजलाते हैं।
जो नहीं खाया वो भी पछता रहा है, जो खा चुका वो आँसू बहा रहा है॥ - हाथ पकड़ कर रोकती, कंजूस की जोरू।
मरने पर क्यों रो रही, रोती जब थे ज्यूं॥ - काका कलयुग आ गया, पकड़ी सुंदर नार।
बैठ स्कूटर पर चले, पीछे बैठा थार॥ - नेताजी भाषण दिए, जनता बैठी मौन।
महंगाई इतनी बढ़ी, अब रोए तो कौन॥ - सजनी सज कर बैठिए, साजन आने वाले हैं।
आकर वो तुम्हारी सूरत, बिगाड़ने वाले हैं॥ - तंबूरा ले मंच पर, बैठे प्रेमप्रताप।
साज मिले पंद्रह मिनट, घंटा भर आलाप॥
हास्य रस FAQs-
प्रश्न- हास्य रस किसे कहते है?
उत्तर- जिस काव्य या रचना को पढ़ने, सुनने या देखने से मन में हँसी का भाव उत्पन्न होता है, उसे हास्य रस कहते है।
प्रश्न- हास्य रस स्थायी भाव क्या होता है?
उत्तर- हास्य रस का स्थायी भाव हास होता है
प्रश्न- हास्य रस के कितने अंग ( अवयव ) होते है?
उत्तर- हास्य रस के चार अंग ( अवयव ) होते है- ( स्थायी भाव, विभाव, अनुभाव और संचारी भाव )
प्रश्न- हास्य रस के कितने भेद होते है?
उत्तर- विकास या प्रकार के आधार पर हास्य रस के छह भेद होते है- ( स्मित, हसित, विहसित, उपहसित, अपहसित और अतिहसित हास्य )
