अतिश्योक्ति अलंकार किसे कहते है? अर्थ, परिभाषा, भेद, और उदाहरण – हिन्दी व्याकरण
अतिश्योक्ति अलंकार किसे कहते है?
अतिश्योक्ति दो शब्द अतिशय + उक्ति से मिलकर बना है-
- अतिशय का अर्थ = बढ़ा – चढ़ाकर
- उक्ति का अर्थ = कथन
परिभाषा – जब काव्य में किसी व्यक्ति, वस्तु या घटना का वर्णन बहुत अधिक बढ़ा-चढ़ाकर या लोक-मर्यादा की सीमा से बाहर किया जाता है, तब वहाँ अतिशयोक्ति अलंकार होता है।
सरल शब्दों में- जहाँ किसी व्यक्ति या वस्तु का वर्णन लोक सीमा या मर्यादा से अधिक बढ़ा-चढ़ाकर किया जाए वहाँ अतिश्योक्ति अलंकार होता है।
उदाहरण –
आगे नदिया पड़ी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार। राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार।।
इस पंक्ति में कहा गया है कि राणा अभी नदी पार करने के बारे में सोच ही रहे थे कि तब तक घोडा नदी के पार हो गया। अर्थात यहाँ बढ़ा-चढ़ाकर खे जाने के कारण अतिशयोक्ति अलंकार है।
अन्य उदाहरण-
- हनुमान की पूँछ में लगन न पाई आग। लंका सारी जल गई, रह गया न कोई भाग॥
- उसकी आवाज से पूरा शहर काँप उठा।
- वह इतना तेज दौड़ा कि हवा भी पीछे रह गई।
- उसकी सुंदरता के आगे चाँद भी फीका पड़ गया।
- उसकी आवाज से आसमान फट गया।
- हनुमान के कूदते ही समुद्र छोटा पड़ गया।
- सूरदास की आँखों के आँसू से ब्रज डूब गया।
- उसके मुख की चमक से हजारों सूरज लजा जाएँ।
अतिश्योक्ति अलंकार की प्रमुख विशेषताएँ-
- यह अर्थालंकार है।
- इसमें किसी बात को बढ़ा – चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाता है।
- इसमें कथन सामान्य लोक-सीमा से अधिक हो जाता है।
- इसमें कवि की कल्पना और भावो की तीव्रता दिखाई देती है।
- इसमें किसी व्यक्ति, वस्तु, गुण या कार्य को उसकी वास्तविक स्थिति से बहुत अधिक बड़ा करके प्रस्तुत किया जाता है।
- इसमें बात को साधारण तरीके से कहने के बजाय उसके प्रभाव, वीरता, सुंदरता या प्रेम को अत्यधिक तीव्र रूप में दिखाना होता है।
अतिश्योक्ति अलंकार के भेद-
अतिशयोक्ति अलंकार के मुख्यतः 6 भेद माने जाते हैं। अलग-अलग हिंदी व्याकरण की पुस्तकों में इनके नाम या संख्या में थोड़ा अंतर मिल सकता है, लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं में सामान्यतः यही 6 भेद बताए जाते हैं।
1. रूपकातिशयोक्ति-
परिभाषा – जहाँ उपमेय का लोप करके केवल उपमान का वर्णन किया जाता है और उपमान को ही उपमेय मान लिया जाता है, वहाँ रूपकातिशयोक्ति होती है।
उदाहरण-
चंद्रमा आँगन में उतर आया।
यहाँ वास्तव में चंद्रमा नहीं, बल्कि सुंदर मुख वाला व्यक्ति है, लेकिन उपमेय को छिपाकर केवल चंद्रमा कहा गया है। अतः यह रूपकातिशयोक्ति है।
2. भेदकातिशयोक्ति-
परिभाषा- जहाँ किसी वस्तु या व्यक्ति को दूसरी समान वस्तुओं से अलग या श्रेष्ठ बताने के लिए उसके गुण को बहुत बढ़ाकर प्रस्तुत किया जाए, वहाँ भेदकातिशयोक्ति होती है।
उदाहरण-
उसकी सुंदरता के आगे चाँद भी फीका है।
यहाँ व्यक्ति की सुंदरता को चाँद से भी अधिक बताकर उसकी विशेषता को बढ़ाया गया है। अतः यह रूपकातिशयोक्ति है।
3. संबंधातिशयोक्ति-
परिभाषा- जहाँ दो वस्तुओं के बीच वास्तविक संबंध न होते हुए भी संबंध की कल्पना की जाए, वहाँ संबंधातिशयोक्ति होती है।
उदाहरण-
उसकी आँखों में पूरा समुद्र समा गया।
यहाँ आँखों और पूरे समुद्र के बीच असंभव संबंध की कल्पना की गई है। अतः यह रूपकातिशयोक्ति है।
4. असंबंधातिशयोक्ति-
परिभाषा– जहाँ संबंधित वस्तुओं के बीच संबंध न होने की बात को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाए, वहाँ असंबंधातिशयोक्ति होती है।
उदाहरण–
वह इतना दूर था कि उसकी आवाज भी वहाँ तक नहीं पहुँच सकती थी।
यहाँ दूरी को अत्यधिक बढ़ाकर प्रस्तुत किया गया है। अतः यह रूपकातिशयोक्ति है।
5. अक्रमातिशयोक्ति-
परिभाषा- जहाँ कार्य और कारण के क्रम का उल्लंघन करके दोनों को एक साथ घटित होता हुआ बताया जाए, वहाँ अक्रमातिशयोक्ति होती है।
परिभाषा-
सूर्य निकला और उसी क्षण संसार प्रकाश से भर गया।
यहाँ कारण और कार्य को लगभग एक ही क्षण में घटित बताया गया है। अतः यह रूपकातिशयोक्ति है।
6. चपलातिशयोक्ति-
परिभाषा- जहाँ किसी कार्य के होने से पहले ही उसके परिणाम का वर्णन कर दिया जाए, वहाँ चपलातिशयोक्ति होती है।
उदाहरण–
बाण छूटा नहीं था, शत्रु का प्राण निकल गया।
यहाँ बाण के लगने से पहले ही उसके परिणाम शत्रु की मृत्यु का वर्णन कर दिया गया है। अतः यह रूपकातिशयोक्ति है।
अतिश्योक्ति अलंकार के सभी भेद की विशेषता एक नजर में-
| भेद | मुख्य विशेषता |
|---|---|
| रूपकातिशयोक्ति | उपमेय को छिपाकर उपमान का प्रयोग |
| भेदकातिशयोक्ति | किसी को दूसरों से बहुत अधिक श्रेष्ठ बताना |
| संबंधातिशयोक्ति | असंभव संबंध की कल्पना |
| असंबंधातिशयोक्ति | संबंध होते हुए भी संबंध न होने की अतिरंजना |
| अक्रमातिशयोक्ति | कारण-कार्य को एक साथ होना बताना |
| चपलातिशयोक्ति | कार्य से पहले ही परिणाम का वर्णन |
अतिशयोक्ति अलंकार और उत्प्रेक्षा अलंकार में अंतर-
नीचे चार्ट में इन दोनों अलंकारो के अंतर को विस्तार से समझाया गया है-
| अतिशयोक्ति अलंकार | उत्प्रेक्षा अलंकार |
|---|---|
| बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहा जाता है | संभावना या कल्पना की जाती है |
| कथन लोक-सीमा से आगे बढ़ जाता है | उपमेय में उपमान की संभावना होती है |
| उदाहरण: उसकी आवाज से आसमान फट गया। | उदाहरण: उसका मुख मानो चाँद हो। |
| अतिरंजना प्रधान | संभावना/कल्पना प्रधान |
अतिशयोक्ति अलंकार FAQs-
प्रश्न- अतिशयोक्ति अलंकार किसे कहते है?
जहाँ किसी व्यक्ति या वस्तु का वर्णन लोक सीमा या मर्यादा से अधिक बढ़ा-चढ़ाकर किया जाए उसे अतिश्योक्ति अलंकार कहते है।
प्रश्न- अतिशयोक्ति अलंकार में “अतिशयोक्ति” का अर्थ क्या है?
अतिश्योक्ति दो शब्द अतिशय + उक्ति से मिलकर बना है, इसमें अतिशय का अर्थ = बढ़ा – चढ़ाकर और उक्ति का अर्थ = कथन अर्थात किसी बात को साधारण स्थिति से बहुत अधिक बढ़ा-चढ़ाकर कहना
प्रश्न- अतिशयोक्ति अलंकार के कितने भेद है?
अतिशयोक्ति अलंकार के मुख्यतः 6 भेद माने जाते हैं ( रूपकातिशयोक्ति, भेदकातिशयोक्ति, संबंधातिशयोक्ति, असंबंधातिशयोक्ति, अक्रमातिशयोक्ति और चपलातिशयोक्ति )
