वीप्सा अलंकार किसे कहते है? अर्थ, परिभाषा, भेद,और उदाहरण
वीप्सा अलंकार किसे कहते है?
वीप्सा अलंकार को पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार के नाम से भी जाना जाता है-
वीप्सा का अर्थ = बार – बार कहने की इच्छा या पुनरुक्ति की इच्छा
परिभाषा – जब आदर्श, हर्ष, शोक, विस्म्यादोबोधक भावों को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने के लिए शब्दों की पुनरावृत्ति की जाती है उसे वीप्सा अलंकार कहते है। या जिस काव्य में एक ही शब्द एक से अधिक बार आए किन्तु उनका अर्थ एक ही हो उसे वीप्सा अलंकार कहते है।
सरल शब्दों में – जब अत्यंत आदर के साथ शब्दों की पुनरावृत्ति हो वहाँ वीप्सा अलंकार होता है।
उदाहरण –
राम-राम! यह क्या हो गया?
इस वाक्य में राम-राम की पुनरावृत्ति आश्चर्य या चिंता के भाव को प्रकट कर रही है, अतः यह वीप्सा अलंकार है
अन्य उदाहरण –
- शिव-शिव कहते हो क्या?
- मधुर-मधुर में दीपक जल
- सूरज है जग का बुझा-बुझा
- धरती ने खिलाये है ज्वलंत लाल-लाल
- भागो, भागो! शेर आ गया।
- रुको, रुको! मेरी बात तो सुनो
- आओ, आओ, मेरे मित्र
- दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं देता।
- धीरे-धीरे वह आगे बढ़ता गया
- बार-बार समझाने पर भी वह नहीं माना
वीप्सा अलंकार की मुख्य विशेषताएँ-
- इसमें शब्द या वाक्यांश को बार-बार दोहराया जाता है
- पुनरावृत्ति के माध्यम से भाव की तीव्रता या प्रभाव को बढाया जाता है
- हर्ष, शोक, भय, आश्चर्य, उत्साह आदि भावों की अचानक या अत्यधिक अभिव्यक्ति में इसका प्रयोग होता है।
- किसी बात पर विशेष जोर देने या आग्रह प्रकट करने के लिए शब्दों की शब्दों की पुनरावृत्ति की जाती है
- इसमें शब्दों को केवल सजावट के लिए नहीं, बल्कि भाव को प्रभावशाली बनाने के लिए दोहराया जाता है।
- शोक, विलाप, उत्साह और जोश जैसे भावों को व्यक्त करने में वीप्सा अलंकार विशेष रूप से उपयोगी है।
वीप्सा और यमक अलंकार में अंतर-
नीचे चार्ट में इन के अंतर को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है-
| आधार | वीप्सा अलंकार | यमक अलंकार |
|---|---|---|
| परिभाषा | भाव की तीव्रता या विशेष जोर प्रकट करने के लिए शब्द की पुनरावृत्ति होती है। | एक ही शब्द की पुनरावृत्ति अलग-अलग अर्थों में होती है। |
| पुनरावृत्ति का उद्देश्य | भाव को प्रभावशाली बनाना | अलग-अलग अर्थों से काव्य-सौंदर्य उत्पन्न करना |
| अर्थ | बार-बार आने वाले शब्द का अर्थ सामान्यतः एक ही रहता है। | बार-बार आने वाले शब्द का अर्थ अलग-अलग होता है। |
| मुख्य भाव | शोक, भय, हर्ष, आश्चर्य, आग्रह, क्रोध आदि | शब्द-चमत्कार और अर्थ-भेद |
| उदाहरण | “हाय! हाय! मैं क्या करूँ?” | “कनक कनक ते सौ गुनी…” |
| पहचान | भाव की तीव्रता के लिए पुनरावृत्ति | अलग अर्थ के लिए पुनरावृत्ति |
वीप्सा और पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार में अंतर-
दोनों अलंकारों में शब्दों की पुनरावृत्ति होती है, इसलिए इनमें भ्रम हो सकता है। लेकिन इनके उद्देश्य अलग होते हैं।
| आधार | वीप्सा अलंकार | पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार |
|---|---|---|
| परिभाषा | किसी भाव की तीव्रता, अधिकता या विशेष जोर प्रकट करने के लिए शब्द की पुनरावृत्ति होती है। | किसी शब्द की स्वाभाविक रूप से बार-बार पुनरावृत्ति होने से काव्य में सौंदर्य उत्पन्न होता है। |
| उद्देश्य | भाव को तीव्र बनाना | कथन में चमत्कार, लय और प्रभाव उत्पन्न करना |
| भाव की प्रधानता | भाव की तीव्रता मुख्य होती है। | शब्दों की पुनरावृत्ति और उससे उत्पन्न सौंदर्य मुख्य होता है। |
| पुनरावृत्ति | प्रायः भावावेश में शब्द दोहराया जाता है। | एक ही शब्द को जानबूझकर दोहराया जाता है। |
| उदाहरण | “हाय! हाय! मैं क्या करूँ?” | “मधुर-मधुर मेरे दीपक जल।” |
| पहचान | भाव की तीव्रता के लिए पुनरावृत्ति | शब्द की पुनरावृत्ति से सौंदर्य/लय |
वीप्सा अलंकार FAQs-
प्रश्न- वीप्सा अलंकार किसे कहते है?
उत्तर- जब आदर्श, हर्ष, शोक, विस्म्यादोबोधक भावों को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने के लिए शब्दों की पुनरावृत्ति की जाती है उसे वीप्सा अलंकार कहते है
प्रश्न- शिव-शिव कहते हो क्या? इस वाक्य में कौन सा अलंकार है?
उत्तर- यहाँ शब्दों की पुनरावृत्ति आश्चर्य या चिंता के भाव को प्रकट कर रही है, अतः यह वीप्सा अलंकार है
प्रश्न- वीप्सा अलंकार में वीप्सा का क्या अर्थ है?
उत्तर- बार – बार कहने की इच्छा या पुनरुक्ति की इच्छा
