विस्मयादिबोधक किसे कहते है? परिभाषा, भेद और उदाहरण
परिभाषा– जिन अव्यय शब्दों से मन के भाव जैसे खुशी, दुख, आश्चर्य, डर, घृणा आदि प्रकट होते हैं, उन्हें विस्मयादिबोधक अव्यय कहते हैं।
- विस्मयादिबोधक अव्यय के बाद अक्सर ( ! ) विस्मयादिबोधक चिह्न लगाया जाता है।
उदाहरण –
- अरे! तुम यहाँ कैसे?
- वाह ! कितना सुंदर घर है |
- ओह ! ये कैसे हो गया?
- हाय ! मेरा तो सारा कुछ खत्म हो गया |
- छी ! यह कितना गन्दा है।
इन सभी उदाहरणों में अरे, वाह, ओह, हाय, छी इन सभी के द्वारा आश्चर्य को दर्शाया गया है, और विस्मयादिबोधक चिन्ह ( ! ) भी लगाया गया है। इसलिए यह विस्मयादिबोधक वाक्य है।
विस्मयादिबोधक अव्यय के भेद-
मुख्यतः विस्मयादिबोधक अव्यय के दस ( 10 ) भेद होते है।
- शोकबोधक
- तिरस्कार बोधक
- विस्मयादि बोधक
- संबोधन बोधक
- हर्ष बोधक
- भय बोधक
- आशीर्वाद बोधक
- अनुमोदन बोधक
- विदास बोधक
- विवशता बोधक
1 . शोकबोधक-
परिभाषा – ऐसे शब्द जिनमे शोक का भाव हो, उन शब्दों को शोकबोधक कहते है।
जैसे- हाय!, हा!, आह!, ओह!, उफ! , बाप रे!, हे राम!, त्राहि त्राहि! आदि।
उदाहरण –
- हाय! मेरा मित्र दुर्घटना में घायल हो गया।
- हा! मेरा दुर्भाग्य!
- आह! उसके निधन का समाचार सुनकर बहुत दुःख हुआ।
- ओह! बेचारे की हालत बहुत खराब है।
- उफ! यह दुःख सहना कितना कठिन है।
2 . तिरस्कार बोधक –
पहचान – जिन अव्यय शब्दों से किसी व्यक्ति, वस्तु या कार्य के प्रति तिरस्कार, घृणा, अपमान, निंदा या उपेक्षा का भाव प्रकट होता है, उन्हें तिरस्कारबोधक विस्मयादिबोधक कहते हैं।
जैसे- धिक्!, धिक्कार!, छिः!, थू!, चुप! आदि।
उदाहरण-
- धिक्! तुम्हें अपने किए पर शर्म नहीं आती?
- धिक्कार है! ऐसे व्यवहार पर।
- छिः! तुमने कितनी गंदी बात कही।
- थू! ऐसे झूठे व्यक्ति पर।
- हट! मेरे सामने से दूर हो जाओ।
3. विस्मयादि बोधक –
पहचान – ऐसे शब्द जिनमे विस्मय ( आश्चर्य ) का भाव आता हो उन शब्दों को विस्मयादि बोधक कहते है।
जैसे- अरे!, वाह!, ओह!, ओहो!, क्या! ऐ! सच! आदि।
उदाहरण –
- अरे ! यहाँ कैसे आना हुआ?
- वाह! तुमने तो बहुत अच्छा मैच खेला।
- क्या! यह सच में बदल गया।
- क्या! वह सफल हो गया।
- ओह! यह कौन है।
4. संबोधन बोधक –
पहचान – ऐसे अव्यय शब्द जिनसे किसी व्यक्ति, वस्तु, प्राणी या समूह को पुकारने, बुलाने या संबोधित करने के लिए किया जाता है उसे संबोधन बोधक विस्मयादिबोधक कहते है।
जैसे- हे!, अरे!, ओ!, ऐ!, अहो!, रे!, री!, अरी!, भाइयो!, मित्रो! आदि।
उदाहरण-
- हैलो! अपना सामान तो लेते जाइये।
- अरे! तुम कहाँ जा रहे हो?
- ओ भाई! जरा मेरी बात सुनो।
- ऐ लड़के! इधर आओ।
- हे मित्र! मेरी सहायता करो।
5. हर्ष बोधक-
पहचान – जिन विस्मयादिबोधक अव्यय शब्दों से मन में उत्पन्न हर्ष, प्रसन्नता, आनंद, उत्साह या खुशी के भाव का बोध होता है, उन्हें हर्षबोधक विस्मयादिबोधक कहते हैं।
जैसे- वाह!, आहा!, अहा!, शाबाश!, धन्य!, बहुत खूब!, जय!, अति सुंदर! आदि।
उदाहरण –
- शाबाश! बेटा तुमने बहुत अच्छा काम किया।
- अति सुंदर! तुमने बहुत अच्छा चित्र बनाया।
- वाह! तुम्हारा मैच तो बहुत ही कमाल का था
- शाबाश! तुमने परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
- बहुत खूब! तुमने शानदार प्रदर्शन किया।
6. भय बोधक-
पहचान – जिन अव्यय शब्दों से मन में उत्पन्न भय, डर, आतंक, आशंका या संकट के भाव का बोध होता है, उन्हें भयबोधक विस्मयादिबोधक कहते हैं।
जैसे- बचाओ!, बचाइए!, त्राहि!, हाय!, अरे!, ओह!, हे भगवान!, अरे बाप रे!, दुहाई! आदि।
उदाहरण –
- कोरोना की वजह से त्राहि त्राहि! मच गई।
- बाप रे! इतना बड़ा साँप।
- हे भगवान! हमें इस संकट से बचाओ।
- त्राहि! शेर हमारे पीछे पड़ गया।
- हाय! मैं बहुत बड़ी मुसीबत में फँस गया
7. आशीर्वाद बोधक-
पहचान – जिन अव्यय शब्दों से किसी व्यक्ति के लिए आशीर्वाद, मंगलकामना, शुभकामना या कल्याण की भावना प्रकट होती है, उन्हें आशीर्वादबोधक विस्मयादिबोधक कहते हैं।
जैसे- जीते रहो!, खुश रहो!, सुखी रहो!, सदा प्रसन्न रहो!, दीर्घायु हो!, यशस्वी भव!, चिरंजीवी भव!, कल्याण हो! आदि।
उदाहरण –
- जीते रहो! ऐसे ही तरक्की करते रहो।
- दीर्घायु हो! दूधो नहाओ पूतो फलो।
- यशस्वी भव! तुम्हें हर क्षेत्र में सफलता मिले।
- चिरंजीवी भव! ईश्वर तुम्हें लंबी आयु प्रदान करे।
- कल्याण हो! तुम्हारे सभी कार्य सफल हों।
8. अनुमोदन बोधक –
पहचान – जिन अव्यय शब्दों से किसी व्यक्ति के कार्य, विचार या प्रयास के प्रति स्वीकृति, समर्थन, प्रशंसा या सहमति का भाव प्रकट होता है, उन्हें अनुमोदनबोधक विस्मयादिबोधक कहते हैं।
जैसे- ठीक!, अच्छा!, साधु!, धन्य!, उत्तम!, खूब! अवश्य! हाँ हाँ ! आदि।
उदाहरण-
- अवश्य! तुम यह कर सकते हो।
- बहुत अच्छा! अब आगे जाकर दिखाओ।
- हाँ हाँ ! हम जरुर मिलेंगे।
- साधु! तुमने सत्य का साथ दिया।
- उत्तम! तुम्हारा उत्तर बिल्कुल सही है।
9. विदास बोधक –
पहचान – ऐसे अव्यय शब्द जिनसे किसी व्यक्ति के विदा होने, अलग होने या प्रस्थान करने का भाव प्रकट होता है, उन्हें विदाबोधक विस्मयादिबोधक कहते हैं।
जैसे- अच्छा!, नमस्कार!, फिर मिलेंगे!, अलविदा!, चलता हूँ!, चलता हूँ भाई!, विदा!, शुभ यात्रा! आदि।
उदाहरण –
- अच्छा! तो हम चलते है।
- टा-टा! फिर आएंगे हम मिलने।
- नमस्कार! फिर मुलाकात होगी।
- अलविदा! अपना ध्यान रखना।
- शुभ यात्रा! सुरक्षित वापस आना।
10. विवशता बोधक-
पहचान – ऐसे अव्यय शब्द जिनसे किसी कार्य को करने या न करने में मजबूरी, लाचारी, असमर्थता या विवशता का भाव प्रकट होता है, उन्हें विवशताबोधक विस्मयादिबोधक कहते हैं।
जैसे- क्या करें!, हाय!, मजबूर हूँ!, लाचार हूँ!, विवश हूँ!, काश!, कदाचित!, हे भगवान! आदि।
उदाहरण-
- काश! मेरे पास एक कार होती।
- हे भगवान! अब मेरा क्या हाल होगा।
- फसोस! मैं समय पर वहाँ नहीं पहुँच सका।
- क्या करूँ! मेरे पास पैसे ही नहीं हैं।
- हाय! मैं चाहकर भी उसकी सहायता नहीं कर सकता।
Check: सम्पूर्ण हिंदी व्याकरण
विस्मयादिबोधक अव्यय FAQs
प्रश्न- विस्मयादिबोधक अव्यय किसे कहते है?
उत्तर- जिन शब्दों से मन के भाव जैसे खुशी, दुख, आश्चर्य, डर, घृणा आदि प्रकट होते हैं, उन्हें विस्मयादिबोधक अव्यय कहते हैं।
प्रश्न- विस्मयादिबोधक अव्यय के मुख्यतः कितने भेद होते है?
उत्तर- विस्मयादिबोधक अव्यय के मुख्यतः दस ( 10 ) भेद होते है
प्रश्न- जिन शब्दों से दुःख, शोक, पीड़ा या पछतावे का भाव प्रकट हो वहाँ विस्मयादिबोधक का कौन सा भेद होता है?
उत्तर- शोकबोधक विस्मयादिबोधक
प्रश्न-जिन शब्दों से तिरस्कार, अपमान, निंदा या उपेक्षा का भाव प्रकट हो वहाँ विस्मयादिबोधक का कौन सा भेद होता है?
उत्तर- तिरस्कारबोधक विस्मयादिबोधक
