समास : परिभाषा, भेद, उदाहरण व उपयोगिता
July 25, 2025
समास की परिभाषा
समास (Compound word) दो या दो से अधिक शब्दों के संयोग से बना हुआ वह सारगर्भित शब्द है, जिसमें शब्दों के मेल से नया अर्थ निर्मित होता है और वाक्यांश की अपेक्षा शब्द संक्षिप्त हो जाता है।
( दो या दो से अधिक शब्दों को संक्षिप्त करके एक शब्द बनाने की प्रक्रिया को समास कहते हैं )
जैसे: ‘राजपुत्र’ (राजा का पुत्र), ‘वनराज’ (वन का राजा अर्थात् सिंह)।
- समास का विलोम व्यास होता है या विग्रह होता है |
- समास का शाब्दिक अर्थ है संक्षिप्त या संक्षिप्तीकरण या संक्षेपीकरण |
समास के भेद
समास मुख्यतः छः ( 6 ) प्रकार के होते हैं। प्रत्येक की परिभाषा व उदाहरण नीचे दिए गए हैं:
- तत्पुरुष समास
- द्वंद्व समास
- द्विगु समास
- बहुव्रीहि समास
- अव्ययीभाव समास
- कर्मधारय समास
सभी भेदों की संक्षिप्त परिभाषा और उदाहरण
1. तत्पुरुष समास
- परिभाषा: इसमें उत्तरपद प्रधान होता है और पूर्वपद कारक में रहता है।
- उदाहरण: ग्रामेश्वर (ग्राम का ईश्वर), मार्गदर्शक (मार्ग का निर्देशन करने वाला)
2. द्वंद्व समास
- परिभाषा: इसके दोनों पद प्रधान होते हैं और ‘और’ का अर्थ छिपा रहता है।
- उदाहरण: गुरु-शिष्य (गुरु और शिष्य), राम-लक्ष्मण
3. द्विगु समास
- परिभाषा: जिसमें संख्यावाचक या परिमाणवाचक शब्द पहले आता है।
- उदाहरण: पंचवटी (पाँच वृक्षों वाला), सप्तर्षि (सात ऋषि)
4. बहुव्रीहि समास
- परिभाषा: जब दोनों पद मिलकर किसी तीसरे व्यक्ति/वस्तु का बोध कराएँ।
- उदाहरण: चक्रपाणि (चक्र धारण करने वाला – विष्णु), नीलकंठ (नीला कंठ होने वाला – शिव)
5. अव्ययीभाव समास
- परिभाषा: जिसमें पहला पद अव्यय होता है और पूरा शब्द अव्यय के रूप में प्रयोग होता है।
- उदाहरण: सदाकाल (सदा के लिए), प्रतिदिन (हर दिन)
6 . कर्मधारय समास
- जिस समास में पहला पद विशेषण और दूसरा पद विशेष्य होता है, उसे कर्मधारय समास कहते हैं।
- उदाहरण: नीलकमल = नीला है जो कमल, मृगनयन = मृग के समान नयन
समास की उपयोगिता
- भाषा में संक्षिप्तता आती है: लम्बे वाक्यांशों की जगह छोटा, सारगर्भित शब्द।
- स्पष्टता और अर्थ की घनता मिलती है।
- शैली और काव्यात्मकता बढ़ती है।
- मूल्यवान पाठ्य सामग्री के निर्माण में सहायक।
- संचार की गति बढ़ती है, वैज्ञानिक, साहित्यिक और दैनिक भाषा में अत्यंत उपयोगी।
समास हिंदी भाषा-व्याकरण को उन्नत, प्रभावशाली और सुगम बनाते हैं। इनके अध्ययन से भाषा की सुंदरता और अर्थ की गहराई सहजता से समझी जा सकती है।
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